भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 647, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 647

भेदनकर्त्ता, युद्ध में शीघ्र जाने वाले, जल को प्रेरित करने वाले, तेज धारण करने वाले, शत्रुपराभवकारी एवं स्वर्ग प्राप्त कराने वाले इंद्र के पास हमारी स्तुतियां सभी प्रकार से पहुंचें. (२) आकरे वसोर्जरिता पनस्यतेऽनेहसः स्तुभ इन्द्रो दुवस्यति. विवस्वतः सदन आ हि पिप्रिये सत्रासामभिमातिहनं स्तुहि.. (३) शत्रुओं का बल नष्ट करने वाले इंद्र की धन के साधन युद्ध में सब स्तुति करते हैं. वह पापरहित इंद्र स्तुतियों को स्वीकार करते हैं एवं यजमान के घर में सोमपान से परम प्रसन्न होते हैं. हे विश्वामित्र! शत्रुओं का पराभव एवं संहार करने वाले इंद्र की स्तुति करो. (३) नृणामु त्वा नृतमं गीर्भिरुक्थैर्भि प्र वीरमर्चता सबाधः. सं सहसे पुरुमायो जिहीते नमो अस्य प्रदिव एक ईशे.. (४) हे मनुष्यों के उत्तम नेता एवं परमवीर इंद्र! राक्षसों द्वारा बाधित ऋत्विज् स्तुतियों एवं उक्थों से प्रमुख रूप से तुम्हारी पूजा करते हैं. वृत्रहनन आदि प्रसिद्ध कर्म करने वाले इंद्र शक्ति पाने के लिए गमन करते हैं. एकमात्र पुरातन एवं सर्व जगत् के स्वामी इंद्र को नमस्कार है. (४) पूर्वीरस्य निष्षिधो मर्त्येषु पुरू वसूनि पृथिवी बिभर्ति. इन्द्राय द्याव ओषधीरुतापो रयिं रक्षन्ति जीरयो वनानि.. (५) मनुष्यों पर इंद्र अनेक प्रकार से अनुशासन करते हैं. इंद्र के लिए धरती नाना प्रकार के धन धारण करती है. स्वर्ग, ओषधियां, जल, मनुष्य एवं वन इंद्र के निमित्त धनों की रक्षा करते हैं. (५) तुभ्यं ब्रह्माणि गिर इन्द्र तुभ्यं सत्रा दधिरे हरिवो जुषस्व. बोध्या३पिरवसो नूतनस्य सखे वसो जरितृभ्यो वयो धाः.. (६) हे अश्वों के स्वामी इंद्र! ऋत्विज् तुम्हारे निमित्त स्तोत्र एवं स्तुति मंत्र वास्तव में धारण करते हैं. तुम उनका सेवन करो. हे सबको निवास देने वाले, सखा एवं व्याप्त इंद्र! तुम्हारे निमित्त दिए गए अभिनव हवि को जानो तथा स्तुतिकर्त्ताओं को अन्न दो. (६) इन्द्र मरुत्व इह पाहि सोमं यथा शार्याते अपिबः सुतस्य. तव प्रणीती तव शूर शर्मन्ना विवसन्ति कवयः सुयज्ञाः.. (७) हे मरुतों से युक्त इंद्र! तुमने राजा शार्यात के यज्ञ में जिस प्रकार सोमरस पिआ था, उसी प्रकार इस यज्ञ में भी पिओ. हे शूर! तुम्हारे बाधाहीन निवास में स्थित शोभन यज्ञ करने वाले बुद्धिमान् तुम्हें हव्य देकर तुम्हारी सेवा करते हैं. (७) ebook converter DEMO Watermarks*