ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 732, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंनहि ष्मा ते शतं चन राधो वरन्त आमुरः. न च्यौत्नानि करिष्यतः.. (९) हे इंद्र! बाधक राक्षस तुम्हारी सैकड़ों संपत्तियों को नष्ट नहीं कर सकते. वे तुम्हारे शत्रुनाशक बल को भी नहीं रोक सकते. (९) अस्माँ अवन्तु ते शतमस्मान्त्सहस्रमूतयः. अस्मान्विश्वा अभिष्टयः.. (१०) हे इंद्र! तुम्हारे सैकड़ों-हजारों रक्षासाधन हमारी रक्षा करें. तुम्हारे सभी प्रयास हमारी रक्षा करें. (१०) अस्माँ इहा वृणीष्व सख्याय स्वस्तये. महो राये दिवित्मते.. (११) हे इंद्र! तुम इस यज्ञ में हम यजमानों को मित्रता, अविनाशी भाव एवं दीप्तिशाली महान् धन का भागी बनाओ. (११) अस्माँ अविड्ढि विश्वहेन्द्र राया परीणसा. अस्मान्विश्वाभिरूतिभिः.. (१२) हे इंद्र! तुम महान् धन के द्वारा हमारी प्रतिदिन रक्षा करो. तुम अपने सभी रक्षासाधनों से हमारी रक्षा करो. (१२) अस्मभ्यं ताँ अपा वृधि व्रजाँ अस्तेव गोमतः. नवाभरिन्द्रोतिभिः.. (१३) हे इंद्र! तुम रक्षा के नवीन उपायों द्वारा शूर के समान हमारे लिए उन गोशालाओं के द्वार खोलो, जिनमें गाएं रहती हों. (१३) अस्माकं धृष्णुया रथो द्युमाँ इन्द्रानपच्युतः. गव्युरश्वयुरीयते.. (१४) हे इंद्र! हमारा शत्रुविनाशकारी, दीप्तिशाली, विनाशरहित, बैलों और घोड़ों से युक्त रथ सभी जगह जावे. उस रथ के साथ-साथ हमारी भी रक्षा करो. (१४) अस्माकमुत्तमं कृधि श्रवो देवेषु सूर्य. वर्षिष्ठं द्यामिवोपरि.. (१५) हे सर्वप्रेरक इंद्र! देवों में हमारा यश उसी प्रकार उत्कृष्ट बनाओ, जिस प्रकार तुमने वर्षा करने में सक्षम आकाश को सभी लोगों के ऊपर धारण किया है. (१५) सूक्त—३२ देवता—इंद्र आ तू न इन्द्र वृत्रहन्नस्माकमर्धमा गहि. महान्महीभिरूतिभिः.. (१) हे शत्रुहंता एवं महान् इंद्र! तुम अपने महान् रक्षासाधनों को लेकर शीघ्र ही हम लोगों के समीप आओ. (१) ebook converter DEMO Watermarks*