भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 736, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 736

जिस समय ऋभुओं ने अपने माता-पिता को परिचर्या द्वारा वृद्ध से युवा बनाया एवं अन्य उत्तम कार्यों द्वारा शोभा प्राप्त की, उसी समय इंद्र आदि देवों की मित्रता उन्हें प्राप्त हुई. धीर ऋभुगण यजमान के लिए गौ आदि संपत्तियों द्वारा पुष्टि धारण करते हैं. (२) पुनर्ये चक्रुः पितरा युवाना सना यूयेव जरणा शयाना. ते वाजो विभ्वाँ ऋतुरिन्द्रवन्तो मधुप्सरसो नोऽवन्तु यज्ञम्.. (३) ऋभुओं ने कटे हुए काठ के समान जीर्ण एवं पड़े रहने वाले अपने माता-पिता को नित्य तरुण बना दिया. वे वाज, विभु और ऋभु इंद्र के साथ मिलकर सोमरस का पान करें एवं हमारे यज्ञों की रक्षा करें. (३) यत्संवत्समृभवो गामरक्षन्यत्संवत्समृभवो मा अपिंशन्. यत्संवत्समभरन्भासो अस्यास्ताभिः शमीभिरमृतत्वमाशुः.. (४) ऋभुओं ने एक वर्ष तक मरी हुई गाय की रक्षा की. वे एक वर्ष तक उसके शरीर की प्रभा को सुरक्षित रखे रहे. एक वर्ष ऋभुओं ने गाय के अवयवों को रखा था. इन कार्यों से ऋभुओं को अमर पद प्राप्त हुआ. (४) ज्येष्ठ आह चमसा द्वा करेति कनीयान्त्रीन्कृणवामेत्याह. कनिष्ठ आह चतुरस्करोति त्वष्ट ऋभवस्तत्पनयद्वचो वः.. (५) बड़े ऋभु ने कहा—“हम चमस को दो बनावेंगे.” उससे छोटे ऋभु ने कहा—“हम एक चमस के तीन करेंगे.” सबसे छोटा ऋभु बोला—“हम चमस के चार भाग करेंगे.” हे ऋभुओ! तुम्हारे गुरु त्वष्टा ने चमस के चार भाग करने वाली बात मान ली. (५) सत्यमूचुर्नर एवा हि चक्रुरनु स्वधामृभवो जग्मुरेताम्. विभ्राजमानांश्चमसाँ अहेवावेनत्त्वष्टा चतुरो ददृश्वान्.. (६) मानव रूपधारी ऋभुओं ने सच्ची बात कही थी. उन्होंने जैसा कहा था, वैसा किया. चमस के चार भाग करने के तुरंत बाद ऋभुगण तृतीय सवन में स्वधा के भागी बने. दिवस के समान तेजस्वी चार चमसों को देखकर त्वष्टा ने उन्हें लेने की अभिलाषा प्रकट की. (६) द्वादश द्यून्यदगोह्यस्यातिथ्ये रणन्नृभवः ससन्तः. सुक्षेत्राकृण्वन्नयनन्त सिन्धून्धन्वातिष्ठन्नोषधीर्निम्नमापः.. (७) जिसे छिपाया नहीं जा सकता, ऐसे सूर्य के घर में ऋभुगण अतिथि के रूप में सत्कार पाते हुए बारह दिन तक सुखपूर्वक रहते हैं. जब वे सूने खेतों को वर्षा द्वारा फसलों से भरा- पूरा एवं नदियों को प्रवाहशील बनाते हैं, उस समय जलरहित स्थान में ओषधियां उत्पन्न होती हैं एवं निचले स्थान में पानी भर जाता है. (७) ebook converter DEMO Watermarks*