भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 741, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 741

हे ऋभुओ! तुम शोभन कर्मों द्वारा देव बने थे एवं गिद्ध के समान स्वर्गलोक में बैठे थे. तुम बल, पुत्र एवं रत्नदान करो. हे सुधन्वा के पुत्रो! तुम मरणरहित हुए थे. (८) यत्तृतीयं सवनं रत्नधेयमकृणुध्वं स्वपस्या सुहस्ताः. तद्भवः परिषिक्तं व एतत्सं मदेभिरिन्द्रियेभिः पिबध्वम्.. (९) हे शोभन हाथों वाले ऋभुओ! तुमने रमणीय कर्म की इच्छा से तीसरे सवन को रमणीय सोमरस के दान से युक्त बनाया था, इसलिए तुम प्रमुदित इंद्रियों से भली प्रकार निचोड़ा हुआ सोमरस पिओ. (९) सूक्त—३६ देवता—ऋभुगण अनश्वो जातो अनभीशुरुक्थ्यो३ रथस्त्रिचक्रः परि वर्तते रजः. महत्तद्वो देव्यस्य प्रवाचनं द्यामृभवः पृथिवीं यच्च पुष्यथ.. (१) हे ऋभुओ! तुम्हारे द्वारा अश्विनीकुमारों को दिया हुआ तीन पहियों वाला रथ घोड़ों और रस्सियों के अभाव में भी आकाश में घूमता है. तुम्हारा यह काम प्रशंसा के योग्य है. यह कर्म तुम्हारे देवत्व को प्रसिद्ध करता है. इसके द्वारा तुम धरती और आकाश का पोषण करते हो. (१) रथं ये चक्रुः सुवृतं सुचेतसोऽविह्वरन्तं मनसस्परि ध्यया. ताँ ऊ न्व१स्य सवनस्य पीतय आ वो वाजा ऋभवो वेदयामसि.. (२) सुंदर अंतःकरण वाले ऋभुओं ने मन के ध्यान से भली प्रकार चलने वाले पहियों से युक्त एवं कुटिलताहीन रथ बनाया. हे वाजगण एवं ऋभुओ! इस तीसरे सवन में सोमरस पीने के लिए हम तुम्हें बुलाते हैं. (२) तद्वो वाजा ऋभवः सुप्रवाचनं देवेषु विभवो अभवन्महित्वनम्. जिब्री यत्सन्ता पितरा सनाजुरा पुनर्युवाना चरथाय तक्षथ.. (३) हे वाजगण, ऋभुगण एवं विभुगण! तुम्हारी यह विशेषता देवों में प्रसिद्ध है कि तुमने अपने वृद्ध माता-पिता को दोबारा युवा एवं चलने-फिरने योग्य बनाया. (३) एकं वि चक्र चमसं चतुर्वयं निश्चर्मणो गामरिणीत धीतिभिः. अथा देवेष्वमृतत्वमानश श्रुष्टी वाजा ऋभवस्तद्व उक्थ्यम्.. (४) हे ऋभुओ! तुमने एक चमस को चार भागों में बांटा एवं अपनी कुशलता से बिना चमड़े वाली गाय को चमड़े से ढक दिया. यही तुम में अमरता पाई जाती है. हे वाजगण एवं ऋभुओ! तुम्हारा यह काम प्रशंसा करने योग्य है. (४) ebook converter DEMO Watermarks*