ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 781, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंदीप्त! हमें धन दो. (४) देवीर्द्वारो वि श्रयध्वं सुप्रायणा न ऊतये. प्रप्र यज्ञं पृणीतन.. (५) हे द्वार की देवियो! तुम सुखपूर्वक गमन का साधन हो. तुम अलग-अलग होकर हमारी रक्षा के निमित्त यज्ञ को पूर्ण करो. (५) सुप्रतीके वयोवृधा यह्वी ऋतस्य मातरा. दोषामुषासमीमहे.. (६) शोभन रूप वाली, अन्न बढ़ाने वाली, महती एवं यज्ञ का निर्माण करने वाली रात्रि तथा उषा देवियों की हम स्तुति करते हैं. (६) वातस्य पत्मन्नीळिता दैव्या होतारा मनुषः. इमं नो यज्ञमा गतम्.. (७) हे अग्नि एवं आदित्य से उत्पन्न दो होताओ! तुम दोनों स्तुति सुनकर वायु के समान तेज चलते हो. तुम हमारे इस यज्ञ में आओ. (७) इळा सरस्वती मही तिस्रो देवीर्मयोभुवः. बर्हिः सीदन्त्वस्रिधः.. (८) इडा, सरस्वती एवं मही तीनों देवियां सुखकारक हैं. वे हिंसारहित होकर इस यज्ञ में बैठें. (८) शिवस्त्वष्टरिहा गहि विभुः पोष उत त्मना. यज्ञेयज्ञे न उदव.. (९) हे त्वष्टा! तुम सुखकर होकर इस यज्ञ में आओ. तुम पोषकरूप में व्याप्त हो. तुम प्रत्येक यज्ञ में हमारी भली प्रकार रक्षा करो. (९) यत्र वेत्थ वनस्पते देवानां गुह्या नामानि. तत्र हव्यानि गमय.. (१०) हे वनस्पति! तुम जिस स्थान में देवों के गोपनीय नामों को जानते हो, उसी स्थान में हव्यों को पहुंचाओ. (१०) स्वाहाग्नये वरुणाय स्वाहेन्द्राय मरुद्भ्यः. स्वाहा देवेभ्यो हविः.. (११) यह हवि अग्नि और वरुण, इंद्र और मरुद्गण तथा समस्त देवों को स्वाहा के रूप में दिया गया है. (११) सूक्त—६ देवता—अग्नि अग्निं तं मन्ये यो वसुरस्तं यं यन्ति धेनवः. अस्तमर्वन्त आशवोऽस्तं नित्यासो वाजिन इषं स्तोतृभ्य आ भर.. (१) ebook converter DEMO Watermarks*