भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 801, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 801

में अन्न दो, क्योंकि महान् धन एवं अन्न तुम्हीं से उत्पन्न होता है. (७) तव द्युमन्तो अर्चयो ग्रावेवोच्यते बृहत्. उतो ते तन्यतुर्यथा स्वानो अर्त त्मना दिवः.. (८) हे अग्नि! तुम्हारी लपटें प्रकाश वाली हैं. तुम सोमलता कुचलने वाले पत्थर के समान महान् हो. तुम स्वयं द्योतमान हो. तुम्हारा शब्द मेघगर्जन के समान है. (८) एवाँ अग्निं वस्यवः सहसानं ववन्दिम. स नो विश्वा अति द्विषः पर्षन्नावेव सुक्रतुः.. (९) धन की इच्छा करने वाले हम लोग बल का आचरण करने वाले अग्नि की वंदना करते हैं. वे शोभनकर्म वाले अग्नि हमें उसी प्रकार शत्रुओं से पार करें. जिस प्रकार नाव सरिता के पार लगाती है. (९) सूक्त—२६ देवता—अग्नि अग्ने पावक रोचिषा मन्द्रया देव जिह्वया. आ देवान्वक्षि यक्षि च.. (१) हे शोधक एवं दीप्तिशाली अग्नि! तुम अपनी दीप्ति और देवों को प्रसन्न करने वाली जिह्वा से यज्ञ में देवों को बुलाओ तथा उनके निमित्त यज्ञ करो. (१) तं त्वा घृतस्नवीमहे चित्रभानो स्वर्दृशम्. देवाँ आ वीतये वह.. (२) हे घृत प्रेरक एवं अनेक विशाल लपटों वाले अग्नि! तुझ सर्वद्रष्टा की हम याचना करते हैं. हव्य भक्षण करने के लिए तुम देवों को बुलाओ. (२) वीतिहोत्रं त्वा कवे द्युमन्तं समिधीमहि. अग्ने बृहन्तमध्वरे.. (३) हे क्रांतदर्शी, हव्य भक्षण करने वाले, यज्ञ को सुशोभित करने वाले, दीप्तिशाली एवं महान् अग्नि! हम यज्ञ में तुम्हें समिधाओं द्वारा प्रज्वलित करते हैं. (३) अग्ने विश्वेभिरा गहि देवेभिर्हव्यदातये. होतारं त्वा वृणीमहे.. (४) हे अग्नि! तुम सब देवों के साथ हव्य देने वाले यजमान के यज्ञ में आओ. इसीलिए हम देवों को बुलाने वाले तुमसे प्रार्थना करते हैं. (४) ebook converter DEMO Watermarks*