भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 804, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 804

हे अग्नि! तुम प्रज्वलित होकर जल पर अधिकार करते हो एवं हव्यदाता यजमान के मंगल के लिए रक्षा करते हो. तुम जिस यजमान के पास जाते हो, वह सभी प्रकार की संपत्ति धारण करता है. वह तुम्हारे सामने तुम्हारे सत्कार योग्य हव्य को रखता है. (२) अग्ने शर्ध महते सौभगाय तव द्युम्नान्युत्तमानि सन्तु. सं जास्पत्यं सुयममा कृणुष्व शत्रूयतामभि तिष्ठा महांसि.. (३) हे अग्नि! हमें शोभन धन वाला बनाने के लिए हमारे शत्रुओं का नाश करो. तुम्हारा तेज उत्कृष्ट हो. तुम हम पति-पत्नी के संबंधों को नियमित एवं हमारे शत्रुओं के तेज को नष्ट करो. (३) समिद्धस्य प्रमहसोऽग्ने वन्दे तव श्रियम्. वृषभो द्युमन्वाँ असि समध्वरेष्विध्यसे.. (४) हे प्रज्वलित एवं परम तेजस्वी अग्नि! हम यजमान तुम्हारी स्तुति करते हैं. तुम कामवर्षी एवं धनवान् हो तथा यज्ञों में भली प्रकार प्रज्वलित होते हो. (४) समिद्धो अग्न आहुत देवान्यक्षि स्वध्वर. त्वं हि हव्यवाळसि.. (५) हे यजमानों द्वारा बुलाए गए एवं शोभन यज्ञ से युक्त अग्नि! तुम भली प्रकार प्रज्वलित होकर इंद्रादि देवों का हवन करो. तुम हव्य वहन करने वाले हो. (५) आ जुहोता दुवस्यताग्निं प्रत्यत्यध्वरे. वृणीध्वं हव्यवाहनम्.. (६) हे ऋत्विजो! तुम हमारा यज्ञ आरंभ होने पर हव्य ढोने वाले अग्नि में हवन करो, उनकी सेवा करो, उन्हें प्राप्त करो एवं अपना हव्य देवों के समीप पहुंचाने के लिए उन्हें वरण करो. (६) सूक्त—२९          देवता—इंद्र एवं उशना त्र्यर्थमा मनुषो देवताता त्री रोचना दिव्या धारयन्त. अर्चन्ति त्वा मरुतः पूतदक्षास्त्वमेषामृषिरिन्द्रासि धीरः.. (१) मनु के यज्ञ के तीन तेजों एवं अंतरिक्ष में होने वाले तीन प्रकाशयुक्तों को मरुतों ने धारण किया है. हे इंद्र! पवित्र-शक्ति वाले मरुत् तुम्हारी स्तुति करते हैं. हे धीर इंद्र! तुम इन्हें देखने वाले हो. (१) अनु यदीं मरुतो मन्दसानमार्चन्निन्द्रं पपिवांसं सुतस्य. आदत्त वज्रमभि यदहिं हन्नपो यह्वीरसृजत्सर्तवा उ.. (२) ebook converter DEMO Watermarks*