भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

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पृष्ठ 825

प्र वो रयिं युक्ताश्वं भरध्वं राय एषेऽवसे दधीत धीः. सुशेव एवैरैशिजस्य होता ये व एवा मरुतस्तुराणाम्.. (५) हे मरुतो! तुम हमें अश्वयुक्त संपत्ति प्रदान करो. स्तोताजन धन पाने एवं उसकी रक्षा के निमित्त तुम्हारी स्तुति करते हैं. उशिज के पुत्र कक्षीवान् राजा के होता अत्रि तेज चलने वाले घोड़े पाकर सुखी हों. तुम्हारे दिए हुए वे घोड़े वेगवान् हों. (५) प्र वो वायुं रथयुजं कृणुध्वं प्र देवं विप्रं पनितारमर्कैः. इषुध्यव ऋतसापः पुरन्धीर्वस्वीर्नो अत्र पत्नीरा धिये धुः.. (६) हे ऋत्विजो! तुम तेजस्वी, विशेषरूप से कामपूरक एवं स्तुतियोग्य वायुदेव को यज्ञ में जाने के लिए अर्चनीय स्तुतियों द्वारा विशेष प्रकार से रथ पर बैठाओ. गतिशालिनी यज्ञ का स्पर्श करने वाली, रूपवती एवं प्रशंसायोग्य देव पत्नियां हमारे यज्ञ में आवें. (६) उप व एषे वन्द्येभिः शूषैः प्र यह्वी दिवश्चितयद्भिरर्कैः. उषासानक्ता विदुषीव विश्वामा हा वहतो मर्त्याय यज्ञम्.. (७) हे महती उषा एवं रात्रि! हम वंदना के योग्य अन्य देवों के साथ-साथ तुम्हारे लिए सुखकर एवं ज्ञान कराने वाले मंत्रों द्वारा हव्य देते हैं. तुम यजमान के सभी कर्मों को जानकर यज्ञ में आओ. (७) अभि वो अर्चे पोष्यावतो नून्वास्तोष्पतिं त्वष्टारं रराणः. धन्या सजोषा धिषणा नमोभिर्वनस्पतीँरोषधी राय एषे.. (८) हम अनेक भक्तों के पोषक व यज्ञ के नेता आप देवों की स्तुति धन पाने के लिए हव्य देकर करते हैं. हम वास्तुपति, त्वष्टा, धनदात्री व अन्य देवों के साथ रहने वाले धिषणा, वनस्पतियों एवं ओषधियों की स्तुति करते हैं. (८) तुजे नस्तने पर्वताः सन्तु स्वैतवो ये वसवो न वीराः. पनित आप्त्यो यजतः सदा नो वर्धन्निः शंसं नर्यो अभिष्टौ.. (९) वे मेघ जो वीरों के समान संसार को निवासस्थान देने वाले, शोभन गतियुक्त, स्तुति योग्य, सबके प्राप्त करने योग्य, यज्ञ के पात्र एवं सदा मानवों का हित करने वाले हैं, हमारे लिए विस्तृत दान के अनुकूल बनें. (९) वृष्णो अस्तोषि भूम्यस्य गर्भं त्रितो नपातमपां सुवृक्ति. गृणीते अग्नेरेतरी न शूषैः शोचिष्केशो नि रिणाति वना.. (१०) हम अंतरिक्ष में स्थित एवं वर्षा करने वाले, बादल के गर्भरूप एवं जल के रक्षक विद्युतरूप अग्नि की स्तुति पापरहित एवं शोभन स्तोत्रों द्वारा करते हैं. तीन स्थानों में व्याप्त ebook converter DEMO Watermarks*