भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 898, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 898

हे शोभनदानशील अग्नि! जो मरणधर्मा यजमान यज्ञकर्त्ता बनकर तुम्हारी स्तुति करता है, वह संपत्तिशाली बने. हे दीप्त एवं महान् अग्नि! तुम्हारे द्वारा रक्षित यजमान भयानक पाप के समान शत्रुओं पर आक्रमण करता है. (४) समिधा यस्त आहुतिं निशितिं मर्त्यो नशत्. वयावन्तं स पुष्यति क्षयमग्ने शतायुषम्.. (५) हे अग्नि! जो मनुष्य हमारी मंत्रयुक्त आहुति को समिधाओं द्वारा विस्तृत करता है, वह सौ वर्ष तक पुत्र-पौत्र युक्त गृह को पाता है. (५) त्वेषस्ते धूम ऋण्वति दिवि षञ्छुक्र आततः. सूरो न हि द्युता त्वं कृपा पावक रोचसे.. (६) हे दीप्तिशाली अग्नि! तुम्हारा निर्मल धुआं अंतरिक्ष में विस्तृत होकर बादल के रूप में चलता है. हे पवित्रकर्त्ता अग्नि! तुम स्तुतियां सुनकर सूर्य के समान दीप्ति युक्त होते हो. (६) अधा हि विश्वीड्योऽसि प्रियो नो अतिथिः. रण्वः पुरीव जूर्यः सूनुर्न त्रय्याय्यः.. (७) हे प्रजाओं में स्तुत्य अग्नि! तुम हमें अतिथितुल्य प्रिय, नगर में वर्तमान हितसाधक के समान रमणीय एवं पुत्र के समान पालन करने योग्य हो. (७) क्रत्वा हि द्रोणे अज्यसेऽग्ने वाजी न कृत्व्यः. परिज्मेव स्वधा गयोऽत्यो न ह्वार्यः शिशुः.. (८) हे अग्नि! मंथनरूप कार्य से तुम्हारा अरणि में होना मालूम होता है. घोड़ा जिस प्रकार सवार को ढोता है, उसी प्रकार तुम हव्यवहन करो. हे वायुतुल्य सर्वत्रगामी अग्नि! तुम अन्न एवं घर देते हो. तुम उत्पन्न होते ही घोड़े के समान टेढ़े चलते हो. (८) त्वं त्या चिदच्युताग्ने पशूर्न यवसे. धामा ह यत्ते अजर वना वृश्चन्ति शिक्वसः.. (९) हे अग्नि! तुम मजबूत लकड़ियों को घास खाने वाले घोड़े के समान भक्षण करते हो. हे जरारहित एवं दीप्त अग्नि! तुम्हारी ज्वालाएं वनों को नष्ट कर देती हैं. (९) वेषि ह्यध्वरीयतामग्ने होता दमे विशाम्. समृधो विशपते कृणु जुषस्व हव्यमङ्गिरः.. (१०) हे अग्नि! तुम यज्ञ की अभिलाषा करने वाले लोगों के घर में यज्ञ के होता के रूप में प्रवेश करते हो. हे प्रजापालक, हमें समृद्ध करो. हे अंगाररूप अग्नि! हमारा हव्य स्वीकार ebook converter DEMO Watermarks*