ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 900, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंस इदस्तेव प्रति धादसिष्यञ्छिशीत तेजोऽयसो न धाराम्. चित्रध्रजतिर्रतियो अक्तोर्वेर्न दृषद्वदा रघुपत्मजंहाः.. (५) अग्नि बाण फेंकने वाले के समान अपनी ज्वालाएं आगे बढ़ाते हैं एवं फरसे की धार के समान तेज करते हैं. वे विचित्र गति एवं पैर सिकोड़कर रात में वृक्ष पर निवास करने वाले पक्षी के समान रात बिताते हैं. (५) स ईं रेभो न प्रति वस्त उस्राः शोचिषा रारपीति मित्रमहाः. नक्तं य ईमरुषो यो दिवा नूनमर्त्यो अरुषो यो दिवा नृन्.. (६) अग्नि स्तुतियोग्य सूर्य के समान तेजस्वी किरणें फैलाते हैं, सबके अनुकूल प्रकाश बढ़ाते हुए अपने तेज से शब्द करते हैं एवं रात में प्रकाशित होकर लोगों को दिन के समान अपने-अपने काम में लगा देते हैं. तेजस्वी एवं मरणरहित अग्नि दिन में देवों के प्रति अपनी किरणें भेजते हैं. (६) दिवो न यस्य विधतो नवीनोद्वृषा रुक्ष ओषधीषु नूनोत्. घृणा न यो ध्रजसा पत्मना यन्ना रोदसी वसुना दं सुपत्नी.. (७) अग्नि दीप्त सूर्य के समान किरणें विस्तृत करने वाले, कामपूरक व तेजस्वी हैं तथा ओषधियों के मध्य में भारी ध्वनि करते हैं. दीप्त एवं गतिशील तेज द्वारा चलने वाले अग्नि हमारे शत्रुओं को वश में करते हुए धरती-आकाश को धन से पूर्ण करते हैं. (७) धायोभिर्वा यो युज्येभिरर्कैर्विद्युन्न दविद्योत्स्वेभिः शुष्मैः. शर्धो वा यो मरुतां ततक्ष ऋभुर्न त्वेषो रभसानो अद्यौत्.. (८) जो अग्नि स्वयं रथ में जुड़ने वाले घोड़ों के समान किरणों के साथ आगे बढ़ते हैं, वे अपने तेजों द्वारा बिजली के समान चमकते हैं. मरुतों की शक्ति सीमित करने वाले, सूर्य के समान तेजस्वी एवं वेगशाली अग्नि प्रकाशित होते हैं. (८) सूक्त—४ देवता—अग्नि यथा होतमर्नुषो देवताता यज्ञेभिः सूनो सहसो यजासि. एवा नो अद्य समना समानानुशन्नग्न उशतो यक्षि देवान्.. (१) हे देवों को बुलाने वाले एवं बलपुत्र अग्नि! तुमने जिस प्रकार मनुवंशी यजमानों के यज्ञ को हव्यों द्वारा पूर्ण किया था, उसी प्रकार आज यज्ञपात्र देवों को अपने समान समझकर यज्ञ पूरा करो. (१) स नो विभावा चक्षणिर्न वस्तोरग्निर्वन्दारु वेद्यश्चनो धात्. ebook converter DEMO Watermarks*