ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 936, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे मार्ग-निर्माता एवं विद्वान् इंद्र! तुम सुगम और दुर्गम दोनों प्रकार के मार्गों में हमारे आगे चलो. हे इंद्र! अपने श्रमरहित, महान् एवं वहनकुशल अश्वों द्वारा हमारे लिए अन्न लाओ. (१२) सूक्त—२२ देवता—इंद्र य एक इद्धव्यश्चर्षणीनामिन्द्रं तं गीर्भिरभ्यर्च आभिः. यः पत्यते वृषभो वृष्णयावान्त्सत्यः सत्वा पुरुमायः सहस्वान्.. (१) जो एकमात्र इंद्र प्रजाओं द्वारा विपत्तियों में बुलाने योग्य हैं, जो स्तोताओं की पुकार सुनकर दौड़े आते हैं, जो कामवर्षी, शक्तिशाली, सत्यभाषी, शत्रुनाशक, विशाल बुद्धि वाले एवं शत्रुपराभवकारी हैं, उन्हें हम इन स्तुतियों द्वारा बुलाते हैं. (१) तमु नः पूर्वे पितरो नवग्वाः सप्त विप्रासो अभि वाजयन्तः नक्षद्दाभं ततुरिं पर्वतेष्ठामद्रोधवाचं मतिभिः शविष्ठम्.. (२) नौ महीने वाला यज्ञ करने वाले, बुद्धिमान्, हमारे सप्त अंगिरा आदि पूर्व पुरुषों ने आक्रमणकारी शत्रुओं का दमन करने वाले, गतिसंपन्न, अतिक्रमणहीन आदेश वाले तथा पर्वतों पर स्थित इंद्र को अन्न का स्वामी बनाकर स्तुतियां कीं. (२) तमीमह इन्द्रमस्य रायः पुरुवीरस्य नृवतः पुरुक्षोः. यो अस्कृधोयुरजरः स्वर्वाॅन्तमा भर हरिवो मादयध्यै... (३) हम इंद्र से बहुत पुत्र-पौत्रों सहित, अनेक सेवकों सहित, विविध पशुओं से युक्त, सदा रहने वाला, नाशरहित एवं सुख देने वाला धन मांगते हैं. हे हरि नामक घोड़ों के स्वामी इंद्र! तुम हमारे सुख के लिए हमें वह धन दो. (३) तन्नो वि वोचो यदि ते पुरा चिज्जरितार आनशुः सुम्नमिन्द्र. कस्ते भागः किं वयो दुध्र खिद्धः पुरुहूत पुरूवसोऽसुरघ्नः.. (४) हे इंद्र! तुम्हारे पुराने स्तोताओं ने जिस सुख को प्राप्त किया था, उसे हमें भी बताओ. हे दुर्धर शत्रुओं को दुःख देने वाले बहुतों द्वारा बुलाए हुए, असुरनाशक एवं अधिक संपत्ति वाले इंद्र! तुम्हारे लिए कौन सा भाग एवं हव्य निश्चित किया गया है? (४) तं पृच्छन्ती वज्रहस्तं रथेष्ठामिन्द्रं वेपी वक्वरी यस्य नू गीः. तुविग्राभं तुविकूर्मिं रभोदां गातुमिषे नक्षते तुम्रमच्छ.. (५) यज्ञकर्म करने वाले एवं गुणवर्णनयुक्त वाणी वाले यजमान वज्रधारी, रथ पर बैठने वाले, अनेक यज्ञों को स्वीकार करने वाले एवं अनेक यज्ञों के करने हेतु शक्ति देने वाले इंद्र की पूजा ebook converter DEMO Watermarks*