ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 938, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे बहुतों द्वारा बुलाए गए, यज्ञकर्म के विधाता एवं अतिशय यज्ञपात्र इंद्र! तुम सबके द्वारा पसंद किए गए घोड़ों की सहायता से हमारे समीप आओ. देवों एवं दानवों द्वारा न रोके जाने वाले घोड़ों के द्वारा तुम हमारे सामने आओ. (११) सूक्त—२३ देवता—इंद्र सुत इत्त्वं निमिश्ल इन्द्र सोमे स्तोमे ब्रह्माणि शस्यमान उक्थे. यद्वा युक्ताभ्यां मघवन्हरिभ्यां बिभ्रद्वज्रं बाह्वोरिन्द्र यासि.. (१) हे इंद्र! जब सोमरस निचुड़ जाता है, महान् स्तोत्र बोलना आरंभ हो जाता है एवं वैदिक स्तुतियां होने लगती हैं, तब तुम अपने रथ में घोड़े जोड़ते हो. हे धनस्वामी इंद्र! तुम दोनों हाथों में वज्र उठाकर रथ में जुड़े हुए दो घोड़ों की सहायता से आते हो. (१) यद्वा दिवि पार्ये सुष्विमिन्द्र वृत्रहत्येऽवसि शूरसातौ. यद्वा दक्षस्य बिभ्युषो अबिभ्यदरन्धयः शर्धत इन्द्र दस्यून्.. (२) हे इंद्र! तुम स्वर्ग से उस युद्ध में उपस्थित होकर हव्यदाता यजमान की रक्षा करते हो, जिस में वीर सम्मिलित होते हैं. तुम भयरहित होकर यज्ञकार्य में कुशल एवं भयभीत यजमान को बाधा पहुंचाने वाले दस्युजनों को वश में करते हो. (२) पाता सुतमिन्द्रो अस्तु सोमं प्रणेनीरुग्रो जरितारमूती. कर्ता वीराय सुष्वय उ लोकं दाता वसु स्तुवते कीरये चित्.. (३) इंद्र निचोड़े हुए सोम को पीने वाले हैं. इंद्र यज्ञकर्म में कुशल एवं भली प्रकार सोम निचोड़ने वाले एवं स्तुतिकर्त्ता यजमान को निवासस्थान एवं धन देते हैं. (३) गन्तेयान्ति सवना हरिभ्यां बभ्रिर्वज्रं पपिः सोम ददिर्गाः. कर्ता वीरं नर्यं सर्ववीरं श्रोता हवं गृणतः स्तोमवाहाः.. (४) वज्र धारण करने वाले, सोमरस पीने वाले, गाएं देने वाले, मानव हितकारी एवं अनेक पुत्रों से युक्त पुत्र देने वाले, स्तोता की स्तुतियां सुनने वाले एवं स्तोत्रों द्वारा सेवनीय इंद्र इन तीनों सवनों में अपने घोड़ों की सहायता से जाते हैं. (४) अस्मै वयं यद्वावान तद्विविष्म इन्द्राय यो नः प्रदिवो अपस्कः. सुते सोमे स्तुमसि शंसदुक्थेन्द्राय ब्रह्म वर्धनं यथासत्.. (५) हमारे कल्याण के लिए पोषण आदि कर्म करने वाले प्राचीन इंद्र जिन स्तोत्रों को चाहते हैं, उन्हें हम बोलते हैं. सोमरस निचुड़ जाने पर हम उन्हें बुलाते हैं. वेदमंत्रों का उच्चारण करते हुए हम इंद्र को इस प्रकार हव्य देते हैं, जिससे उनकी उन्नति हो सके. (५) ebook converter DEMO Watermarks*