ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 941, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंन यं जरन्ति शरदो न मासा न द्याव इन्द्रमवकर्शयन्ति. वृद्धस्य चिद्वर्धतामस्य तनूः स्तोमेभिरुक्थैश्च शस्यमाना.. (७) वर्ष एवं मास इंद्र को बूढ़ा नहीं बनाते. दिन भी उन्हें दुर्बल नहीं करते. हमारी स्तुतियां सुनकर महान् इंद्र का शरीर बढ़े. (७) न वीळवे नमते न स्थिराय न शर्धते दस्युजूताय स्तवान्. अज्रा इन्द्रस्य गिरयश्चिदृष्वा गम्भीरे चिद्भवति गाधमस्मै.. (८) हमारी स्तुतियां सुनकर इंद्र दृढ़शरीर एवं युद्ध में अविचल रहने वाले यजमान के वश में नहीं होते और न दस्युओं द्वारा उत्साहित तथा प्रेरित यजमान की ही बात मानते हैं. महान् पर्वत भी इंद्र के लिए सुगम हैं एवं अधिक गहरा स्थान भी इंद्र से बच नहीं सकता. (८) गम्भीरेण न उरुणामत्रिन्प्रेषो यन्धि सुतपावन्वाजान्. स्था ऊ षु ऊर्ध्व ऊती अरिषण्यन्नक्तोर्व्युष्टौ परितक्म्यायाम्.. (९) हे बलवान् एवं सोम पीने वाले इंद्र! तुम गंभीर एवं विस्तृत मन से हमें अन्न तथा शक्ति दो. तुम हमारी हिंसा न करते हुए रात-दिन हमारी रक्षा के लिए तैयार रहो. (९) सचस्व नायमवसे अभीक इतो वा तमिन्द्र पाहि रिषः. अमा चैनमरण्ये पाहि रिषो मदेम शतहिमाः सुवीराः.. (१०) हे इंद्र! तुम यज्ञकर्म के नेता यजमान की रक्षा करो एवं समीपवर्ती तथा दूरवर्ती शत्रुओं से उसे बचाओ. तुम घर में तथा जंगल में यजमान की रक्षा करो. हम शोभन-संतान वाले बनकर सौ वर्ष तक प्रसन्न रहें. (१०) सूक्त—२५ देवता—इंद्र या त ऊतिरवमा या परमा या मध्यमेन्द्र शुष्मिन्नस्ति. ताभिरू षु वृत्रहत्येऽवीर्न अभिश्न वाजैर्महान्न उग्र.. (१) हे बलवान् इंद्र! तुम्हारे जो अधम, मध्यम एवं उत्तम रक्षा-साधन हैं, उनके द्वारा युद्ध में हमारी भली-भांति रक्षा करो. हे उग्र एवं महान् इंद्र! तुम हमें भोजन के साधनरूप अन्न से युक्त करो. (१) आभिः स्पृधो मिथतीररिषण्यन्नमित्रस्य व्यथया मन्युमिन्द्र. आभिर्विश्वा अभियुजो विषूचीरार्याय विशोऽव तारीर्दासीः.. (२) हे इंद्र! हमारी स्तुतियों से प्रसन्न होकर हमारी शत्रुघातिनी सेना की रक्षा करते हुए शत्रुओं के कोष को समाप्त करो. इन्हीं स्तुतियों से प्रसन्न होकर यज्ञ करने वाले यजमान के ebook converter DEMO Watermarks*