ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 955, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे इंद्र! सुनने योग्य स्तोत्रों को जल्दी सुनो एवं हमारी सेवा की कामना करते हुए सूर्य के समान शत्रुओं का धन जीतो. तुम समय-समय पर बल से स्तुति के विषय और हव्यान्र द्वारा भली-भांति ज्ञात होकर पहले के समान हमारे पास रहो. (५) सूक्त—३७ देवता—इंद्र अर्वाग्रथं विश्ववारं त उग्रेन्द्र युक्तासो हरयो वहन्तु. कीरिश्चिद्धि त्वा हवते स्वर्नान्नृधीमहि सधमादस्ते अद्य.. (१) हे उग्र इंद्र! तुम्हारे रथ में जुड़े हुए घोड़े तुम्हारे सब लोगों द्वारा पूजा योग्य रथ को मेरे सामने लावें. गुण वाले स्तोता अर्थात् भरद्वाज तुम्हें बुलाते हैं. हम आज तुम्हारे साथ प्रसन्न होते हुए उन्नति करें. (१) प्रो द्रोणे हरयः कर्माग्मन्पुनानास ऋज्यन्तो अभूवन्. इन्द्रो नो अस्य पूर्व्यः पपीयाद्द्युक्षो मदस्य सोम्यस्य राजा.. (२) हरे रंग का सोमरस हमारे यज्ञ में बहता है एवं पवित्र बनकर कलश में सीधी तरह जाता है. पुरातन, दीप्तिशाली एवं इस नशीले सोमरस के राजा इंद्र इस सोमरस को पिएं. (२) आसस्राणासः शवसानमच्छेन्द्रं सुचक्रे रथ्यासो अश्वाः. अभि श्रव ऋज्यन्तो वहेयुर्नू चिन्नु वायोरमृतं वि दस्येत्.. (३) चारों ओर चलने वाले एवं शोभन पहियों वाले रथ में जुड़े हुए घोड़े रथ पर बैठे हुए इंद्र को हमारे सामने लावें. अमृत-तुल्य सोमरसरूपी हवि हवा से न सूखे. (३) वरिष्ठो अस्य दक्षिणामिर्तीन्द्रो मघोनां तुविकूर्मितमः. यया वज्रिवः परियास्यंहो मघा च धृष्णो दयसे वि सूरीन्.. (४) अतिशय शक्तिशाली एवं भांति-भांति के काम करने वाले इंद्र हव्य-अन्न के स्वामी लोगों के मध्य यजमान को दक्षिणा देते हैं. हे वज्रधारी इंद्र! तुम उसी दक्षिणा द्वारा पाप का नाश करते हो. हे शत्रुनाशक इंद्र! उसी दक्षिणा से तुम स्तोताओं को धन तथा संतान देते हो. (४) इन्द्रो वाजस्य स्थविरस्य दातेन्द्रो गीर्भिर्वर्धतां वृद्धमहाः. इन्द्रो वृत्रं हनिष्ठो अस्तु सत्वा ता सूरिः पृणाति तूतुजानः.. (५) इंद्र महान् बल के दाता हों. तेजस्वी इंद्र हमारी स्तुतियों के कारण वृद्धि प्राप्त करें. शत्रुनाशक इंद्र जल रोकने वाले को मारें. इंद्र अत्यंत शीघ्रतापूर्वक वे धन हमें दें. (५) सूक्त—३८ देवता—इंद्र ebook converter DEMO Watermarks*