ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 97, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंजगाना, आगे चलना, रक्षार्थ स्तुति १-३ ८१. उषा की स्तुति १-६ शोभननेत्री, अन्न याचना, सुख वहन, प्रिय होने, धन, यश व निवास हेतु निवेदन १-६ ८२. इंद्र व वरुण की स्तुति १-१० गृह याचना, बल देना, आह्वान, प्राणियों का निर्माण, बाधक बल १-६ पाप व संताप मिलना, मैत्री, आह्वान, धन व घर के लिए स्तुति ७-१० ८३. इंद्र व वरुण की स्तुति १-१० यजमान, लड़ना, फसलों का नाश, भेद का वध रक्षा के लिए स्तुति, तृत्सुओं की रक्षा, युद्ध में न टिक पाना, सुदास १-८ सुख, धन और घर हेतु स्तुति ९-१० ८४. इंद्र व वरुण की स्तुति १-५ घी का चमचा (जुहू), निवास स्थान व धन याचना, पुत्र-पौत्र की रक्षा हेतु स्तुति १-५ ८५. इंद्र व वरुण की स्तुति १-५ युद्ध में रक्षा व शत्रुनाश हेतु प्रार्थना, आह्वान, प्रजा पालन व आह्वान, रक्षार्थ स्तुति १-५ ८६. वरुण की स्तुति १-८ धरती विशाल बनाना, देखने की इच्छा, पाप पूछना, अजेय पाप मुक्ति हेतु प्रार्थना स्वप्न, ज्ञान संपन्न करने व रक्षार्थ प्रार्थना १-८ ८७. वरुण का वर्णन १-७ जल देना, जगत् की आत्मा, सहायक, इक्कीस नाम १-४ सूर्य को झूला जैसा बनाना, जलनिर्माता व सागर स्थिर करने वाले, अपराधी पर भी अनुग्रह ५-७ ८८. वरुण का वर्णन १-७ धनस्वामी, निचोड़ा गया सोमरस, नाव चलाना १-३ ebook converter DEMO Watermarks*