भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 990, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 990

हे मार्गपालक पूषा! हम अन्नलाभ एवं यज्ञपूर्ति के लिए तुम्हें युद्ध में रथ के समान अपने सामने करते हैं. (१) अभि नो नर्यं वसु वीरं प्रयतदक्षिणम्. वामं गृहपतिं नय.. (२) हे पूषा! मानव हितकारी, धन के द्वारा दरिद्रता नष्ट करने वाला, प्राचीन काल में धनदानकर्त्ता एक गृहस्वामी हमें दो. (२) अदित्सन्तं चिदाघृणे पूषन्दानाय चोदय. पणेश्चिद्धि म्रदा मनः.. (३) हे दीप्तिसंपन्न पूषा! दान न देने वाले को दान करने की प्रेरणा दो एवं पणि का मन भी मृदु बनाओ. (३) वि पथो वाजसातये चिनुहि वि मृधो जहि. साधन्तामुग्र नो धियः.. (४) हे उग्र पूषा! अन्नलाभ के लिए सब रास्ते साफ करो, बाधकों को नष्ट करो एवं हमारा यज्ञकार्य पूरा करो. (४) परि तृन्धि पणीनामारया हृदया कवे. अथेमस्मभ्यं रन्धय.. (५) हे ज्ञानसंपन्न पूषा! लौहदंड द्वारा पणियों के हृदय घायल करो एवं उन्हें हमारे वश में करो. (५) वि पूषन्नारया तुद पणेरिच्छ हृदि प्रियम्. अथेमस्मभ्यं रन्धय.. (६) हे पूषा! लौहदंड से पणि का हृदय घायल करो. उसके मन में दान की प्रिय इच्छा उत्पन्न करो एवं उसे हमारे वश में लाओ. (६) आ रिख किकिरा कृणु पणीनां हृदया कवे. अथेमस्मभ्यं रन्धय.. (७) हे ज्ञानसंपन्न पूषा! पणियों के हृदयों पर चिह्न बनाओ, उनके मन कोमल करो तथा उन्हें हमारे वश में लाओ. (७) यां पूषन्ब्रह्माचोदनीमाराम् बिभर्प्याघृणे. तया समस्य हृदयमा रिख किकिरा कृणु.. (८) हे दीप्तिशाली पूषा! तुम अन्न की प्रेरणा करने वाला लौहदंड धारण करते हो. उससे सभी लोभियों के हृदयों पर निशान बनाओ एवं उन्हें कोमल करो. (८) या ते अष्ट्रा गोओपशाघृणे पशुसाधनी. तस्यास्ते सुम्नमीमहे.. (९) हे दीप्तिशाली पूषा! तुम्हारा जो लौहदंड गायों एवं पशुओं को चलाने वाला है, उसीसे हम सुख चाहते हैं. (९) ebook converter DEMO Watermarks*