रोगी रोग मुक्त बिना दवाई: योगासन एवं प्राणायाम

रोगी रोग मुक्त बिना दवाई: योगासन एवं प्राणायाम
Rogi Rog Mukt Bina Dawai: Yogasan evam Pranayama
राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा
स्रोत: Swadeshi Chikitsa & Yogasan Series · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)
DevanagariHindipublished60 पृष्ठ
पृष्ठ 50, कुल 60 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 50
- • शरीर की रोग-प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाती है, विटामिनों की कमी को दूर करती है तथा थकान दूर करके नवशक्ति का संचार करती है।
- • लंबे उपवास-काल के दौरान भूख-प्यास नहीं सताती तथा चेहरे और आंखों एवं शरीर को चमकदार बनाती है। अनिद्रा में इसे ज्ञान-मुद्रा के साथ करें।
❖ सहज शंख मुद्रा :
- • दोनो हाथों की अंगुलियों को आपस में फंसाकर हथेलियां दबाएं। दोनो अंगूठों को मिलाकर तर्जनी उंगली को हल्के से दबाएं, 15 – 15 मिनट तीन बार करें।
- • इससे हकलाने और तुतलाने की समस्या दूर होगी।
❖ लिंग मुद्रा :
लिंग-मुद्रा विधि: चित्र के अनुसार मुट्ठी बाँधें तथा बायें हाथ के अंगूठे को खड़ा रखें, अन्य अंगुलियां बंधी हुई रखें।
50