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रोगों की पहचान

Rogon Ki Pehchaan

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)

DevanagariHindipublished128 पृष्ठ

आरती

जय सदगुरु देवा, स्वामी जय सदगुरु देवा, सब कुछ तुम पर अर्पण करहूँ पद सेवा।

जय गुरुदेव दया निधि, दीनन हितकारी, स्वामी भक्तन हितकारी, जय जय मोह विनाशक, जय जय तिमिर विनाशक, भय भंजन हारी। साहिब जय.....

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, गुरु मूर्ति धारी, स्वामी प्रभु मूर्ति धारी, वेद पुराण बखानत, शास्त्र पुराण बखानत, गुरु महिमा भारी। साहिब जय.....

जप तप तीर्थ संयम, दान विधि दीन्हे, स्वामी दान बहुत दीन्हे, गुरु बिन ज्ञान न होवे, दाता बिन ज्ञान न होवे, कोटि यत्न कीन्हे। साहिब जय.....

माया मोह नदी जल, जीव बहे सारे, स्वामी जीव बहे सारे, नाम जहाज बिठाकर, शब्द जहाज चढ़ाकर, गुरु पल में तारे। साहिब जय.....

काम क्रोध, मद, लोभ, चोर बड़े भारी, स्वामी चोर बहुत भारी, ज्ञान खड़ग दे कर में, शब्द खड़ग देकर में, गुरु सब संहारे। साहिब जय.....

नाना पंथ जगत में निज-निज गुण गावें, स्वामी न्यारे-न्यारे यश गावें, सब का सार बताकर, सब का भेद लखा कर, गुरु मार्ग लावें। साहिब जय.....

गुरु चरणामृत निर्मल, सब पातक हारी, स्वामी सब दोषक हारी, वचन सुनत तम नासे, शब्द सुनत भ्रम नासे, सब संशय टारी। साहिब जय.....

तन, मन, धन सब अर्पण, गुरु चरण कीजै, स्वामी दाता अर्पण कीजै, सदगुरु देव परमपद, सदगुरु देव अचलपद, मोक्ष गती लीजै। साहिब जय.....

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पुस्तक सूची

हिन्दी में

  1. 1. परा रहस्या
  2. 2. मासिक पत्रिका सत्यकेतु
  3. 3. पावन प्रार्थनाएं
  4. 4. सदगुरु चालीसा
  5. 5. वार्षिक डायरी
  6. 6. सदगुरु भक्ति
  7. 7. कहाँ से तू आया और कहाँ तूझे जाना रे ?
  8. 8. सत्संग सुधा रस
  9. 9. नाम अमृत सागर
  10. 10. अमृत वाणी
  11. 11. सदगुरु नाम जहाज हैं
  12. 12. चल हंसा सतलोक
  13. 13. कोटि नाम संसार में तिनते मुक्ति न होय।
  14. 14. मूल नाम गुप्त है, जाने बिरला कोय ॥
  15. 15. गुरु सुमित्रे सो पार
  16. 16. तीन लोक से न्यारा
  17. 17. सेहत के लिए जरूरी
  18. 18. सहजे सहज पाइये
  19. 19. रोगों से छुटकारा
  20. 20. सदगुरु महिमा
  21. 21. भक्ति के चोर
  22. 22. अनुरागसागर वाणी
  23. 23. भक्ति सागर
  24. 24. हरि सेवा युग चार है, गुरु सेवा पल एक
  25. 25. सत्य नाम के सुमरते उबरे पतित अनेक
  26. 26. काग पलट हंसा कर दीना
  27. 27. कस्तूरी कुण्डल बसै मृग खोजे बन माहि
  28. 28. गुरु पारस गुरु परस है
  29. 29. गुरु अमृत की खान
  30. 30. शीश दिये जो गुरु मिले तो भी सस्ता जान
  31. 31. मूल सुरति
  32. 32. भृंग मता होय जिहि पास, सो गुरु सत्य धर्मदासा ॥
  33. 33. मैं कहता हूँ आँखिन देखी
  34. 34. गुरु संजीवन नाम बतावे
  35. 35. नाम बिना नर भटक मरे
  36. 36. रोगों की पहचान
  37. 37. यह संसार काल का देश

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