रूपमण्डन एवं देवमूर्त्ति-प्रकरणम् (मण्डन सूत्रधार - प्राचीन मूर्तिकला एवं देव-प्रतिमा लक्षण सटीक)

रूपमण्डन एवं देवमूर्त्ति-प्रकरणम् (मण्डन सूत्रधार - प्राचीन मूर्तिकला एवं देव-प्रतिमा लक्षण सटीक)
Rupamandanam and Devatamurti Prakaranam of Sutradhara Mandana
मण्डन सूत्रधार द्वारा
DevanagariHindipublished335 पृष्ठ
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* **Line 16 (L17):**
`१३३ । (१-२) 'याम्योत्तरतत्संपादमग्रे' इत्यत्र 'याम्योत्तरतत्सपादमग्रम्' ।`
Wait, let's re-verify:
`'याम्योत्तरतत्संपादमग्रे'`
`इत्यत्र`
`'याम्योत्तरतत्सपादमग्रम्' ।`
Wait, look at `तत्सपादमग्रम्`:
`या` `म्यो` `त्त` `र` `त` `त्स` `पा` `द` `म` `ग्र` `म्`
Wait, is it `तत्संपादमग्रे` vs `तत्सपादमग्रम्`?
Wait, look at `तत्सपाद`: is it `तत्पाद` or `तत्सपाद`?
Wait, between `त` and `पा`, what is there?
Let's look really closely at: `याम्योत्तरतत्संपादमग्रे`
Characters: `या` (1) `म्यो` (2) `त्त` (3) `र` (4) `त` (5) `त्सं` (6) `पा` (7) `द` (8) `म` (9) `ग्रे` (10). Total 10 aksaras.
Now the second word: