भारतकोश
रूपमण्डन एवं देवमूर्त्ति-प्रकरणम् (मण्डन सूत्रधार - प्राचीन मूर्तिकला एवं देव-प्रतिमा लक्षण सटीक)

रूपमण्डन एवं देवमूर्त्ति-प्रकरणम् (मण्डन सूत्रधार - प्राचीन मूर्तिकला एवं देव-प्रतिमा लक्षण सटीक)

Rupamandanam and Devatamurti Prakaranam of Sutradhara Mandana

मण्डन सूत्रधार द्वारा

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[ ४ ] विषया: पत्राङ्का: विषया: पत्राङ्का: यथाक्रममेतेषां फलम् ... ८२ नरसिंह: ... ९० द्विचक्रे चक्रनिबन्धने विशेष: ... ” प्रकारान्तरम् ... ९१ यथाक्रममेतेषां फलम् ... ” जलशायी ... ” चक्रान्तराणि ... ८३ वैकुण्ठ: ... ९२ हरि: ... ” विश्वरूप: ... ९३ एतत्पूजाफलम् ... ” अनन्त: ... ” नृसिंह: ... ” त्रैलोक्यमोहन: ... ९४ कपिलनृसिंह: ... ८४ विष्ण्वायतनम् ... ९५ सुदर्शनम् ... ” विष्णुप्रतीहारा: ... ” हयग्रीव: ... ” मत्स्य: ... ” ६। रुद्रमूर्त्ति-लिङ्गाधिकाराख्ये षष्ठे— जनार्दन: ... ” [ ६७—१३० ] कूर्म: ... ८५ शिवमूर्तय:— वराह: ... ” सद्योजात: ... ९७ नरसिंह: ... ” वामदेव: ... ९८ वामन: ... ” अघोर: (१) ... ” जामदग्न्य: ... ” तत्पुरुष: ... ९९ कौशल्यानन्दन: ... ” ईशान: ... ” बुद्ध: ... ८६ मृत्युञ्जय: ... ” कल्की ... ” विजय: ... ” चक्रप्रतिष्ठानिषेध: ... ८७ किरणाक्ष: ... ” चक्रविक्रयादिनिषेध: ... ” अघोर: (२) ... १०० चक्रप्रशंसा ... ” श्रीकण्ठ: ... ” महादेव: ... ” मूर्त्तिविशेषा:— सदाशिव: ... ” पन्नगाशन: ... ८७ अर्धनारीश्वर: ... ” वामन: .. ८९ उमामहेश्वरौ ... १०१ राम: ... ” कृष्णशङ्कर: ... ” नरवराह: ... ” कृष्णकार्त्तिकेय: ... :१ प्रकारान्तरम् ... ९० शिवनारायण: ... ”