सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 220, कुल 288 में से
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शेष वर्ष ( सन् के इकाई वहाई के अंक )
| ० | १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | सन् ÷ ४०० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | शेष जो बचे | |
| ८ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | =शेष सदी । | |
| १७ | १८ | १९ | २० | २१ | २२ | शेष सदी की | |
| २३ | २४ | २५ | २६ | २७ | २८ | इकाई वहाई | |
| २८ | २९ | ३० | ३१ | ३२ | ३३ | =शेष वर्ष । | |
| ३४ | ३५ | ३६ | ३७ | ३८ | ३९ | संकड़ा का | |
| ४० | ४१ | ४२ | ४३ | ४४ | अंक + १ = | ||
| ४५ | ४६ | ४७ | ४८ | ४९ | ५० | पंक्ति । | |
| ५१ | ५२ | ५३ | ५४ | ५५ | ५६ | पंक्ति के साथ | |
| ५६ | ५७ | ५८ | ५९ | ६० | ६१ | में और शेष | |
| ६२ | ६३ | ६४ | ६५ | ६६ | ६७ | वर्ष के ऊपर | |
| ६८ | ६९ | ७० | ७१ | ७२ | सन् का | ||
| ७३ | ७४ | ७५ | ७६ | ७७ | ७८ | नम्बर | |
| ७९ | ८० | ८१ | ८२ | ८३ | ८४ | मिलेगा । | |
| ८५ | ८६ | ८७ | ८८ | ८९ | |||
| ९० | ९१ | ९२ | ९३ | ९४ | ९५ | ||
| ९६ | ९७ | ९८ | ९९ | १०० |
शेष वर्ष ( सन् के इकाई वहाई के अंक )
सन् ईसवी का नम्बर निकालने की रीति ।
सन् ÷ ४०० = शेष सदी । सन् ईसवी यदि ४०० से अधिक हो तो ४०० का भाग दो जो शेष बचे उसे लो । जो इस प्रकार का शेष बचता है उसे शेष सदी कहते हैं । यदि ४०० से कम सन् हो तो चक्र के अनुसार ही पंक्ति का नम्बर होगा, जैसे:—
- शेष ० से ९९ तक = पंक्ति १
- शेष १०० से १९९ तक = पंक्ति २
- शेष २०० से २९९ तक = पंक्ति ३
- शेष ३०० से ३९९ तक = पंक्ति ४
४०० का भाग देने पर जो शेष सदी मिले उसमें फिर १०० का भाग दो जो शेष बचे वह = शेष वर्ष हुआ । और उसमें जितने बार १०० का भाग जाय वह लम्बि हुई । इस लम्बि में १ और जोड़ना तो वह पंक्ति का नम्बर होगा । अर्थात् उस सदी के इकाई वहाई के अंक शेष वर्ष कहलाये जो शेष वर्ष चक्र में दिया है और उस संकड़ा के अंक में १ और जोड़ो तो वह पंक्ति का नम्बर होगा ।