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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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२०२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड

शेष वर्ष ( सन् के इकाई वहाई के अंक )

सन् ÷ ४००
१०११शेष जो बचे
१२१३१४१५१६=शेष सदी ।
१७१८१९२०२१२२शेष सदी की
२३२४२५२६२७२८इकाई वहाई
२८२९३०३१३२३३=शेष वर्ष ।
३४३५३६३७३८३९संकड़ा का
४०४१४२४३४४अंक + १ =
४५४६४७४८४९५०पंक्ति ।
५१५२५३५४५५५६पंक्ति के साथ
५६५७५८५९६०६१में और शेष
६२६३६४६५६६६७वर्ष के ऊपर
६८६९७०७१७२सन् का
७३७४७५७६७७७८नम्बर
७९८०८१८२८३८४मिलेगा ।
८५८६८७८८८९
९०९१९२९३९४९५
९६९७९८९९१००

शेष वर्ष ( सन् के इकाई वहाई के अंक )

सन् ईसवी का नम्बर निकालने की रीति ।

सन् ÷ ४०० = शेष सदी । सन् ईसवी यदि ४०० से अधिक हो तो ४०० का भाग दो जो शेष बचे उसे लो । जो इस प्रकार का शेष बचता है उसे शेष सदी कहते हैं । यदि ४०० से कम सन् हो तो चक्र के अनुसार ही पंक्ति का नम्बर होगा, जैसे:—

  • शेष ० से ९९ तक = पंक्ति १
  • शेष १०० से १९९ तक = पंक्ति २
  • शेष २०० से २९९ तक = पंक्ति ३
  • शेष ३०० से ३९९ तक = पंक्ति ४

४०० का भाग देने पर जो शेष सदी मिले उसमें फिर १०० का भाग दो जो शेष बचे वह = शेष वर्ष हुआ । और उसमें जितने बार १०० का भाग जाय वह लम्बि हुई । इस लम्बि में १ और जोड़ना तो वह पंक्ति का नम्बर होगा । अर्थात् उस सदी के इकाई वहाई के अंक शेष वर्ष कहलाये जो शेष वर्ष चक्र में दिया है और उस संकड़ा के अंक में १ और जोड़ो तो वह पंक्ति का नम्बर होगा ।