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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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२१६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड

(२) दूसरीरीति

\begin{aligned} & १२१ \div (छाया + ६) \\ & = १२१ \div (१४ \text{ छाया} + ६) \\ & = १२१ \div २० = ६ \text{ घ. ३ प.} \\ & = ६ \text{ घ. ३ प. दिन शेष रहा।} \end{aligned}

मान लो इष्ट काल में अपनी छाया को अपने पैर से नापा तो, नाप में १४ पैर निकली। यह छाया मध्याह्न के उपरान्त की है।

२० ) १२१ ( ६ घड़ी

\underline{१२०}

१ \times ६०

२० ) ६० ( ३ पल

\underline{६०}

(३) तीसरी रीति

\begin{aligned} & १०५ \div [ (छाया + ७) - ४ ] \\ & = १०५ \div [ (१४ \text{ छाया} + ७) - ५ ] \end{aligned}

= १०५ \div (२१ - ५)

= १०५ \div १६ = ६ \text{ घ. ३३ प.}

= ६ \text{ घ. ३३ प. दिन शेष रहा।}

यह सब स्थूल रीति है इसका ध्यान रहे।

मान लो छाया का नाप वही १४ पांव है और धन संक्रान्ति होने से धन के ५ घटाना पड़ेगा तो व=५ हुआ।

१६ ) १०५ ( ६ घड़ी

\underline{९६}

२ \times ६०

१६ ) ५४० ( ३३ पल

\underline{४८}

\underline{६०}

\underline{४८}

१२

अध्याय ३६

केवल कुण्डली पर से जन्म समय मास-पक्ष आदि का ज्ञान

केवल कुंडली चक्र किसी का देख कर उस जातक की आयु, जन्म मास, अयन, ऋतु, पक्ष, जन्म तिथि, नक्षत्र, योग, करण, जन्म दिन में या रात में हुआ, जन्म का समय आदि स्थूल रूप से जान सकते हो। इन सबको जानने की रीति पृथक २ समझाते हैं।