सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंदशासाधन : २६१
दशा साधन और दशा का समय निकालने का उदाहरण जिसकी जन्म कुण्डली में विशोत्तरी दशा निकालनी है उसके लिये जन्म नक्षत्र का भयात और भभोग निकालना चाहिए ।
(देखो कुण्डली बनाने का गणित)
मान लो सम्बत् १९९५ इष्ट कालीन सूर्य कन्या के गतांश १५ ( ५ रा १५° ) (यहाँ सूर्य स्पष्ट ठीक नहीं मालुम है केवल राशि अंश मालुम है । इस कारण कला विकला को छोड़ कर सूर्य के केवल राशि अंश लिया है) ।
जन्म नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा भयात (शुक्र षष्ठी) ४८ घ. १२ प, भभोग (पूर्ण नक्षत्र) ६६ घ. १२ प. है । इसका विशोत्तरी मत से दशा साधन करना है ।
विशोत्तरी दशा चक्र में पू. पा. जन्म नक्षत्र से शुक्र की महादशा होती है । इसके पूर्ण वर्ष २० हैं तो शुक्र की महादशा में जन्म हुआ है ऐसा कहेंगे । शुक्र के २० वर्ष में कितने वर्ष शुक्र हो चुके हैं और कितने वर्ष भोगने को रहे हैं गणित से निकालते हैं । (भयात x महादशा वर्ष) ४८ घ. १२ प. x २० वर्ष=२८६२ प. x २० वर्ष=५७२४०
| भभोग | ६६—१२ | ३६७२ पल | ३६७२ |
|---|---|---|---|
| ३६७२)८८५६०(२२ दिन | |||
| षष्ठी के पल बनाये | ७६४४ | ||
| ४८ घ. १२ प. | ६६ घ. १२ प. | ६१२० | |
| x ६० | x ६० | ७६४४ | |
| २८६० | ३६१० | ११७६ | |
| + १२ | + १२ | =१४ वर्ष ६ मा. २२ दिन शुक्ल व. | |
| २८६२ पल | ३६७२ पल | शुक्र वर्ष-मास-दिन | |
| भयात | भभोग | पूर्ण वर्ष—२०, ० ० | |
| ३६७२)५७२४०(१४ वर्ष | शुक्ल वर्ष—१४ ६ २२ | ||
| ३६७२ | [शेष ५ ५ ८ भोग्य वर्ष | ||
| १८१२० | शुक्र को महादशा शुक्र के | ||
| १५८८८ | वर्ष. मा. दि. और भोगने को रही । | ||
| २२२१ | ५ ५ ८ | ||
| x १२ मास | |||
| ३६७२)२६७८४(६ मास | |||
| २३८३२ | |||
| २६५२ | |||
| x ३० दिन |