सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंराशियन्त्रकः १५
राशियन्त्रक विभाग
प्रत्येक चक्र Circle में ३६० अंश होते हैं। इनके १२ विभाग करने से ३६० ÷ १२ = ३० अंश की प्रत्येक राशि होती है।
इसी प्रकार ३६० अंश के २७ विभाग किये = ३६० ÷ २७ = १३°-२०' तो प्रत्येक विभाग १३ अंश २० कला का हुआ अर्थात् राशियन्त्रक को २७ नक्षत्रों में बाँटने से प्रत्येक १३°-२०' का हुआ। अर्थात् एक राशि में २३ नक्षत्र हुए।
प्रत्येक नक्षत्र के ४ विभाग किये तो प्रत्येक विभाग को चरण कहते हैं। इसकारण १ राशि = ३०° = २३ नक्षत्र = ९ चरण। १ चरण = ३°-२०''
| १ चक्र = ३६० अंश degree ( डिगरी ) | } ये कोणत्मक अंशादि है। |
|---|---|
| १ राशि = ३०° ( कला ) | |
| १ अंश = ६०' ( कला ) minute ( मिनट ) | |
| १ कला = ६०'' ( विकला ) Second ( सेकेण्ड ) |
ये चिन्ह अंश कलादि के अंकों की इकाई वाली संख्या के ऊपर दाहिनी ओर कुछ तिरछे लगाये जाते हैं जैसा ऊपर बताया गया है। जहाँ अंश, कला आदि लिखना हो वहाँ केवल ये चिन्ह लगा देते हैं जिसे समझ लेना चाहिये।
कोणत्मक अंश Angular distance
ऊपर जो कोणत्मक अंशादि बताये गये हैं इनके विषय में अच्छी प्रकार समझ लेना चाहिये, क्योंकि उनका अधिक काम पड़ता है।
कोणत्मक अंश को कुछ उदाहरण देकर समझाते हैं।
कोण Angle
जब दो रेखाएँ किसी एक बिन्दु पर परस्पर मिलती हैं तो बीच में एक कोण बन जाता है। देखें चित्र संख्या ८। यहाँ अ. व. एक लकीर, दूसरी लकीर अ. स. पर अ.
चित्र संख्या ८-कोण Angle
चित्र संख्या ९-समकोण
विन्दु पर मिली है जिससे ब अ स कोण बन गया है। वह कोण चित्र में तीर और विन्दुओं से बताया गया है। इसी कोण का नाप अंश, कला, विकला में होता है।