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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

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७२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड

यह अन्तर ( अर्थात् १ तिथि ) मध्यम मान से ५९ घण्टा ३ पल का होता है। चान्द्रमास २९है दिन का होता है, जिसमें ३० तिथियाँ व्यतीत होती हैं। इस प्रकार १२ मास में ३५४ दिन हुए जिसमें ३६० तिथियाँ होती हैं अर्थात् तिथियों का क्रम वृद्धि आदि होकर ६ दिन कम हो जाते हैं।

चन्द्र गति कभी ६६ घंटी से घटते घटते ५० घंटी तक कम हो जाती है। जब तिथि का मान ६० घंटी से अधिक होता है तो वृद्धि तिथि और ६० घंटी से कम होता है तो क्षय तिथि होती है।

वृद्धि तिथि

जैसे सोमवार को ५८ घंटी तक द्वितीया है। १२ अंश अन्तर होने में चन्द्र की गति के अनुसार तृतीया पूर्ण होने को ६५ घंटी लगी। सोमवार को ५८ घंटी के उपरान्त द्वितीया व्यतीत होकर शेष में तृतीया रहेगी। फिर मंगलवार को सब दिन अर्थात् ६० घंटी तृतीया रही और बुध को सूर्योदय के अनन्तर ३ घंटी और तृतीया रही। इस प्रकार सोमवार, मंगलवार और बुधवार को मिलाकर ६५ घंटी तृतीया रही। इसके उपरान्त चतुर्थी आरम्भ हुई।

पंचांग में सोमवार को द्वितीया ५८ घंटी लिखा होगा। मंगल को और बुध को भी तृतीया लिखा रहेगा।

सूर्योदय के उपरान्त वह तिथि चाहें १ घंटी क्यों न हो, जो तिथि सूर्योदय पर होगी वही तिथि पंचांग में लिखी रहेगी। जैसे बुधवार को ३ घंटी तक तृतीया है तो भी उस दिन तृतीया ३ घंटी लिखी रहेगी। इससे समझ जाना चाहिए कि सूर्योदय के उपरान्त ३ घंटी तक तृतीया तिथि थी उसके उपरान्त चतुर्थी तिथि आरम्भ हुई।

इस प्रकार जब दो दिन एक ही तिथि पंचांग में लिखी देखो तो उसे वृद्धि तिथि जानो।

क्षय तिथि

मान लो सोमवार को सूर्योदय के अनन्तर २ घंटी दशमी है। पंचांग में उस दिन २ घंटी लिखा होगा। इसके बाद एकादशी तिथि मान लो ५५ घंटी रही फिर द्वादशी आरम्भ हुई, तो सोमवार को पूरे ६० घंटी में २ घंटी दशमी के गये, बचे ५८ घंटी। इसमें ५५ घंटी एकादशी के गये तो ३ घंटी द्वादशी के बचे तो उस दिन ३ घंटी ही द्वादशी रही। दूसरे दिन मंगलवार को भी शेष द्वादशी रहेगी ही। इस कारण मंगलवार को द्वादशी तिथि पंचांग में लिखी मिलेगी। परन्तु एकादशी तिथि पंचांग में लिखी हुई न मिलेगी। परन्तु ऊपर बताई रीति से जान सकते हो कि ग्यारस कब से कब तक रही। ऐसा नहीं समझना कि पंचांग में ग्यारस नहीं लिखा तो ग्यारस है ही नहीं। सूर्योदय पर जो तिथि किसी भी दिन पंचांग में नहीं बताई गई वह क्षय तिथि समझना।