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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

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पंचाङ्ग के अंग : ७७

किस करण में कौन-कौन तिथि होती है नीचे चक्र में दिया है

पक्ष | करण | किस्तुल | बव | वालव | कौलव | तैतिल | गरल | वणिज | विष्टि | शकुनि | चतुष्यद | नाग | ---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|--- शुक्ल पक्षापूर्वदश | | १ | ५,१२ | २,९ | ६,१३ | ३,१० | ७,४ | ४,११ | ८,१५ | ० | ० | ० | की तिथि उत्तर,, | ० | १,८,१५ | ५,१२ | २,९ | ६,१३ | ३,१० | ७,१४ | ४,११ | ० | ० | ० | | कृष्ण पक्षापूर्व,, | ० | ४,११ | १,८ | ५,१२ | २,९ | ६,१३ | ३,१० | ७,१४ | ० | ३० | ० | | की तिथि उत्तर,, | ० | ७ | ४,११ | १,८ | ५,१२ | २,९ | ६,१३ | ३,१० | १४ | ० | ३० | | तिथियाँ

चक्र में जो अच्छा दिष्ट है ये तिथियों के अच्छे हैं। १५ से पूर्णिमा, ३० से अमावस्या समझना। ऊपर के चक्र से प्रगट होगा कि शुक्ल प्रतिपदा को पहिले किस्तुल फिर बव करण होता है। शुक्ल द्वितीया को वालव फिर कौलव होता है। १५ पूर्णिमा को पहिले चतुष्यद फिर नाग होता है।

इसी को अच्छे प्रकार से समझाने के लिए किस तिथि में कौन करण होता है यह तिथि के अनुसार करण नीचे दिए हैं।

शुक्ल तिथि १ २-९ ३-१० ४-११ ५-१२ ६-१३ ७-१४ ८-१५ X X पूर्व दल किस्तुल वालव तैतिल वणिज बव कौलव गरल विष्टि विष्टि चतुष्यद पर दल बव कौलव गरल विष्टि वालव तैतिल वणिज बव शकुनि नाग कृष्ण तिथि X १-८ २-९ ३-१० ४-११ ५-१२ ६-१३ ७ १४ ३०

भद्रा—विष्टि करण का दूसरा नाम है, जो शुभ कार्यों में अनिष्ट कारक होती है। यह केवल मूहूर्त आदि में विचारणीय है।

पंचाङ्ग में किसी तिथि के पूर्वार्द्ध में जो करण होता है प्रायः वही किस समय तक रहेगा दिया रहता है। इसके बाद जो दूसरा करण आना चाहिए वह नहीं दिया रहता। इस चक्र से समझ में आ जावेगा कि किस तिथि के उत्तरार्द्ध में कौन करण होगा।

दिनमान—सूर्योदय से सूर्यास्त तक दिन की अवधि को दिनमान कहते हैं। इससे प्रगट होता है कि दिन कितने घड़ी पल तक है। अर्थात् दिन कितने घड़ी पल लम्बा है।

दिन रात में ६० घड़ी होती है—( ६० घटी—विनमान )—रात्रिमान।

प्रतिदिन विनमान घटता-बढ़ता रहता है। २१ मार्च से प्रतिदिन बढ़ते-बढ़ते ता० २१ जून को सबसे बड़ा दिन होता है। उसके उपरान्त घटना आरम्भ होता है। इसको पहिले समझा चुके हैं।