भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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सुदर्शन चक्र : १८७

सुदर्शन कुण्डली चक्र के अनुसार भाव फल विचार 2

१--लनन में ५ ग्रह सू० शु० चं० बु० ओर राहु हैं । इतमें सप्तवर्ग में शुभ वर्गंकी

अधिकता से शुभ है । शुक्र बुध भी शुभ वर्ग की अधिकता-से शुभ हैं। चंद्र पाप वर्ग

अधिक होने से पाप और राहु मध्यम है । शुभ ग्रह की अधिकता है इससे शरीर सुख

उत्तम रहेगा । शील आदि भी उत्तम रहेगा । लग्न में भी ४ शुभ वर्ग है सूर्य में भी

वर्ग के अनुसार शुभता आ जाने से २ वर्ग में शुभ हुआ केवल एक शनि पाप फलप्रद

` है। इससे लग्न में भी शुभ वर्ग की अधिकता से शुभ गुण आदि होंगे । '

२--धन भाव में केवळ सूर्य और शुक्र हैं । वर्ग के अनुसार ये दोनों ग्रह शुभप्रद

हैं इससे धनवान्‌ होगा । घन भाव में वर्ग में ३ शुभ ग्रह हैं २ शुभप्रद ओर २ पाप फल

प्रद ग्रह हैं। शुभता अधिक होने से सन्माग से धन का संग्रह होगा । शुभ ग्रह गुरु की

दृष्टि होने से भी घन भाव सम्वन्धी शुभ फल होगा ।

३-- सहज भाव-में केवल शनि है जो पाप ग्रह भी है और पाप फलप्रद है क्योंकि

वर्ग में पाप का वर्ग अधिक है भाव में २ शुभ वर्ग २ पापप्रद, ३ शूभप्रद वर्ग हैं। भाव

में शुभता अधिक है । इसमें स्वस्थानी मंगल की दृष्टि है जो वर्ग में शुभप्रद है । इससे

इस भाव सम्बन्धी .फल मध्यम रहेगा ।

३---चतुर्थ भाव-केवल राहु मध्यम फलप्रद या उदासीन ग्रह है । इसमें ४ शुभ ग्रह

का वर्ग है। १ स्थान में शुभप्रद मंगल है। २ स्थानों में शनि पापफल प्रद है। इस

कारण साधारण सुख, मातुसुख, वाहन सुख आदि रहेगा ।

५--पंचम में-केवळ राहु मध्यम फलप्रद है । इस भाव में ३ शुभ वर्ग, १ स्यान

में शुभ सूर्य की २ स्थानों में शनि पापप्रद का वर्ग है । इससे इस भाव सम्बन्धी विद्या

सन्तान आदि का सुख साधारण रहेगा ।

५--रिपुभाव-शनि और मंगल । वर्ण में मंगल शुभप्रद है । शनि पापप्रद है। इस

भाव में ५ शुभ ग्रह के वर्ग हैं। शेष सूर्यं ओर मंगल भी शुभप्रद हैं। इसलिए शत्रु

और रोगभय नाममात्र को रहेगा । शत्रु और रोग होने पर इनपर विजय होगी ।

७--जाया भाव-इसमें केतु और शनि दोनों पापग्रह हैं ओरं वग में पाप फलप्रद

होने से स्त्रीसुख का अभाव रहेगा । भाव में ४ शुभ ग्रह का वर्ग है । २ स्थानों में सूर्य

१ में मंगळ का वर्ग है जो शुभप्रद है। इससे अल्प स्त्रीसुख भी होगा ।

८--मृत्यु भाव-में केवळ गुरु शुभ फलश्रद है। अष्टम भाव में ४ शुभ ग्रह का वगं

है १ वर्ग सूयं का शुभप्रद, १ मंगळ का शुभप्रद है और १ शनि का पापप्रद है | शुभ

की अधिकता होने से जीवन में सफलता हो आयु पूर्णायु के लगभग हो ।

९--धर्म भाव-इसमें चन्द्र बुध और मंगल ग्रह हैं । चन्द्र पाप फलप्रद है शेष बुध

और मंगल शुभप्रद हैं । इस भाव में ४ शुभ ग्रह का वर्ग है २ वर्ग शनि के पापप्रद १

` सूये का शुभप्रद है । शुभ की अधिकता होने से धर्मशील हो, यात्रा में सफलता मिले ॥: