सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 27, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंग्रहों की दृष्टि का फल 3 १९
शनि से दृष्ट--भॅसा तथा वृक्ष से युक्त धनवान् होता है ।
द्वादशेश से दृष्ट--विवाद कर्ता और प्रिय वोल्ने वाला ।
सब ग्रहों से दृष्ट--समुद्ध, धर्मात्मा, तेजस्वी, रूपवान्, गुणवान् ।
६ शुक्र पर दुष्टि का फल
(१) मंगल क्षेत्री शुक्र पर दृष्टि का फल
सूर्य को=विशेष करके राजा की निरंतर कृपा वाला, स्त्री के कपट से अत्यंत दुःखी ॥
चन्द्र की- श्रेष्ठ प्रतिष्ठा वाला, चंचल चित्त वृत्ति, कामातुरता का विकार ।
मंगल की--धनवान्, सुख से रहित, विशेष दीन और मलिन ।
बुध की--खोटा धन तथा संम्बन्धियों से रहित, अपनी वृद्धि और सामथ्य से
रहित क्रूर, पराये धन को हरण हरने वाला ।
गुरु की--स्त्री पुत्रादिकों के सुख से रहित, श्रेष्ठ देह, शोभायमान, नम्रता युक्त,
उदार चित्त ।
शनि की--गुप्त धन, शांत स्वभाव, माननीय, श्रेष्ठ, अपने जनों की सम्पत्ति सहित
(२) स्वक्षेत्री शुक्र पर दृष्टि
सूयं की- श्रेष्ठ स्त्रियों के धन वाहनों से निश्चय शुभ लाभ ।
चन्द्र की--वेश्याओं में विलास, अपने कुछ का पालक, निर्मल बुद्धि, सुशील, श्रे ष्ठ
चाणी के बिलास में चतुर ।
मंगल की--ग्रह और सौख्य से रहित, लड़ाई में अपमान को प्राप्त ।
बुध की--गुणवान्, श्रेष्ठ भाग्य, काम सहित, सौम्य स्वभाव, बळवान,धेर्यं सहित ।
गुरु की--अष्ठ वाहन और स्त्री, गुण श्रेष्ठ, मित्र-पुत्र धनादि संपूर्ण वस्तुओं
का लाभ ।
शनि की--रोगी, साधुवृत्त से हीन, सौख्य और धन से हीन ।
(३) बुध क्षेत्री शुक्र पर दृष्टि
सूर्यं की--राजा के रनवास का डथोढ़ीवान्, नम्र, गुण युक्त, शास्त्र जानने वाला ।
चन्द्र की- श्रेष्ठ अन्न, वस्त्रादि सुख युक्त, नील कमल के समान श्याम, सु दर
नेत्र, सुन्दर बाल ।
मंगल की--भाग्ययुक्त, कामकला में चतुर, स्त्री के निमित्त धन क। व्यय करने
वाला, कामी ।
बुध की--चतुर, वाहन और धन की वृद्धि वाला, सेना का स्वामी, परिवार के
सौख्य से युक्त, बुद्धिमान् ।
गुरु की--श्रेष्ठ वुद्धि, वृद्ध सहित, बहुत वैभव युक्त, प्रसन्न चित्त निरन्तर नम्र ।
शनि की--अपमान युक्त, चपल स्वभाव, दुःख सहित, मनुष्यों से त्यक्त ।
(४) कर्के के शुक्र पर दृष्टि का फल
सूर्य की--कोधी, हषं का नाश, बैरियो से पीड़ित ।