भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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मारक स्थान : २९१

यदि रात्रि का जन्म है मान लो इष्ट ४५-१५ है ।

(६०-०)-दिनमान ३३-४०रात्रिमान=३६-२० = ८-३ घं० पृछा। प० रात्रि

यमाद्धं इष्ट ४५-१५ | शेष रात्रि ११-३५ में एक रात्रि यमार्ध कई बार घटाया ती

-दिनमान ३३-४० | केवल ३ वार घटा शेष १-४२। बचा वह चौथेयमाद्ध का है

शेष रात्रि-११-३४ | इससे प्रगट हुआ कि मंगलवार के चौथे यमाद्ध रात्रि यमाद्ध के

अनुसार रात्रि को सूर्य के यमाद्ध में जन्म हुआ ।

दंडपति निकालने को रात्रि का १ यमाद्ध ३घ.-१७॥ .प. + ४=०घ.-४३प.-२२॥

वि. का एक दंड हुआ । अंब छठवां शेष १-४२॥ यमाद्ध में कितने दंड हुए निकालना

है । १-४२॥ में एक दंड = ०-४९-२२॥ कई बार घटाया तो केवळ २ बार घटा तो

पूरे दंड का-० घ० ३-प० ४५ वि० केवल बचा इससे सूर्य का रात्रि का तीसरा दंड￾पति चक्र के अनुसार वुध आया ।

लग्न कुंडली

जन्म मंगलवार इष्ट २४ घ०-५६

प०-५६ वि० दिन मान ३३-४० मंगल

के दिन में शनि के यमाद्ध में जन्म

हुआ । जिसका तीसरा दंडाधिपति

राहुं है ।

जहाँ कुण्डली के अनुसार देखा

लग्न का वेध दंड पति से नहीं होतो ।

परन्तु १२ राशि में स्थित चन्द्र से

-७ & ९

रा.ग, दंडपति डान रॉ.