भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 353, कुल 454 में से

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राजयोग : ३४३

३ ग्रह उच्च का--राजा के समान ।

३ग्रह उच्च का--राजपुत्र राजा. हो अन्य मंत्री हो ( शंभु० ) ।

३ पाप ग्रह उच्च के- क्रूर बुद्धि राजा।

३ शुभ ग्रह उच्च के--सत बुद्धि राजा ।

मिश्र ग्रह से--मिश्र स्वभाव वाला हो ( वृ० जा० ) ।

३ ग्रह उच्च, स्वक्षेत्रीय मूल त्रिकोण के--राज्य कुल में उत्पन्न राजा, अन्य

कुल में उत्पन्न मंत्री हो ( जा० भ० ) ।

४ ग्रह उच्च के--राजा हाथियों युक्त पुल बाँधने में समभं बड़ी कीति (जा.भ.)।

४ ग्रह उच्च के और कुंभ नवांश में शुक्र हो--पृथ्वी का राजा (स०चि$) ।

पाप नवांश या कूर नवांश में न हो तब राजा होता है। '

४ ग्रह उच्च के हों कुंभ लग्न में शनि हो तो पृथ्वी का राजा हो (आा०प।रि०)

४ से अधिक ग्रह उच्च के हों तो दिव्य पुरुष हो ( शंभु० )। -

५ ग्रह उच्च के--सावे भौम राजा ( जा० भ०)।

५ ग्रह उच्च के गुरु लग्न में हो--समस्त जन समुदाय का राजा (जा०पारि०) 1

६ ग्रह उच्च के--सब राजाओं का सम्राट्‌ (जो० पारि०) 1

६ ग्रह चन्द्र सहित उच्च के हों वृष लग्न में चन्द्र हो--राजा हो (स० चि०) |

समस्त ग्रह उच्च के--निश्चय राजा ( शंभु० ) ।

२--३२ प्रकार के राजयोग

१--शनि, मंगल, सूर्ये, गुरु ये चारों उच्च के हों तो--४ भेद हुए ।

२--३ ग्रह उच्च के हो ओर इनमें से १ ग्रह लग्न में हों तो--१२ भेद होंगे ।

३--कर्क में चन्द्र और मंगल सूर्य शनि गुरु में से २ ग्रह उच्च के हो तो--१२

भेद होंगे ।

४- इन्ही में से १ ग्रह उच्च राशि में लग्न गत हो तो--४ भेद होंगे ।

सव ३२ प्रकार के योग हुए :

उदाहरण १--मेष का सूरय, ककं का गुरु, तुला का शनि, मकर का मंगल इनकेः

१,४,७,१० से ४ भेद हुए ।

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