सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंराजयोग : ३४३
३ ग्रह उच्च का--राजा के समान ।
३ग्रह उच्च का--राजपुत्र राजा. हो अन्य मंत्री हो ( शंभु० ) ।
३ पाप ग्रह उच्च के- क्रूर बुद्धि राजा।
३ शुभ ग्रह उच्च के--सत बुद्धि राजा ।
मिश्र ग्रह से--मिश्र स्वभाव वाला हो ( वृ० जा० ) ।
३ ग्रह उच्च, स्वक्षेत्रीय मूल त्रिकोण के--राज्य कुल में उत्पन्न राजा, अन्य
कुल में उत्पन्न मंत्री हो ( जा० भ० ) ।
४ ग्रह उच्च के--राजा हाथियों युक्त पुल बाँधने में समभं बड़ी कीति (जा.भ.)।
४ ग्रह उच्च के और कुंभ नवांश में शुक्र हो--पृथ्वी का राजा (स०चि$) ।
पाप नवांश या कूर नवांश में न हो तब राजा होता है। '
४ ग्रह उच्च के हों कुंभ लग्न में शनि हो तो पृथ्वी का राजा हो (आा०प।रि०)
४ से अधिक ग्रह उच्च के हों तो दिव्य पुरुष हो ( शंभु० )। -
५ ग्रह उच्च के--सावे भौम राजा ( जा० भ०)।
५ ग्रह उच्च के गुरु लग्न में हो--समस्त जन समुदाय का राजा (जा०पारि०) 1
६ ग्रह उच्च के--सब राजाओं का सम्राट् (जो० पारि०) 1
६ ग्रह चन्द्र सहित उच्च के हों वृष लग्न में चन्द्र हो--राजा हो (स० चि०) |
समस्त ग्रह उच्च के--निश्चय राजा ( शंभु० ) ।
२--३२ प्रकार के राजयोग
१--शनि, मंगल, सूर्ये, गुरु ये चारों उच्च के हों तो--४ भेद हुए ।
२--३ ग्रह उच्च के हो ओर इनमें से १ ग्रह लग्न में हों तो--१२ भेद होंगे ।
३--कर्क में चन्द्र और मंगल सूर्य शनि गुरु में से २ ग्रह उच्च के हो तो--१२
भेद होंगे ।
४- इन्ही में से १ ग्रह उच्च राशि में लग्न गत हो तो--४ भेद होंगे ।
सव ३२ प्रकार के योग हुए :
उदाहरण १--मेष का सूरय, ककं का गुरु, तुला का शनि, मकर का मंगल इनकेः
१,४,७,१० से ४ भेद हुए ।
(१)