सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 40, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें३२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
चन्द्र से बुध शनि-_मिट्टी का बन बनाने वाला, चित्रकारी, लेखन कर्म
कर्ता; विद्याचायं, विख्यात ।
चन्द्र से गुरु शुक्र-राजा का सेवक, ब्राह्मणों का स्वामी,समर्थ,शोकहीन विद्याचार्य।
चन्द्र से गुरु शनि--पराये संताप वाळा, नीच, सिद्ध किये कार्य वाला, विख्यात
कर्म करने वाला ।
चन्द्र से शुक्र शनि- तेल बेचने वाला, सुवर्णकार, नाच गाना करने वाला,
चित्रकारी या गन्ध से जीविका ।
त्रिग्रह योग
(१) सुर्य चन्द्र मंगल- उत्तम यन्त्र, पत्थर के काम में प्रवीण, लज्जा एवं दया
से रहित, शूरमा (शंभु०), मन्त्र विद्या, अश्व विद्या में कुशल, रुधिर की वेदना से
पीडित, बड़ाशूरवीर, पुत्र रहित (मान०), शूरवीर मन्त्र और अश्व विद्या का ज्ञाता,
लाज और कृपा सें हीन, (जा० भ०), शत्रुओं को मारने वाला, धनी. नीति (कानून)
का ज्ञाता ( जा० पारि० )।
सुर्य चन्द्र बुध--राजा का काम करने वाला, बड़ा तेजस्वी, बातचीत में और
सम्पूर्ण शास्त्र तथा सम्पूर्ण कलाओं में चतुर (शंभु० ) विद्या धन और रूप से युक्त,
काव्य और कथा का प्रेमी, सभा का प्रिय, धनवान्, राजा का सेवक, प्रिय वाथ्य
कहने वाला (मान०), वड़ा यश, राजा का कार्य करने वाला, वात में और शास्त्र
कला में चतुर (जा० भ०), राजाओं में पुज्य, धनवान्, चण्ड, दुर्बळ द्रव्य वाला,
विद्यायुक्त (लग्न चन्द्रि०) ।
सूये चन्द्र गुरु पंडित धूर्त, चंचळ, प्रवीण, सेवा जानने वाला, परदेश जाने
वाला (शंभू) धर्म में तत्पर, राजा का मंत्री, दृढ़ बुद्धि, भाई बन्धुओ का पालक, देव
ब्राह्मण पूजक (मांन०) सेवा की विधि जानने वाला. परदेश जाने वाला, चतुर, प्रवीण
चपल, अत्यन्त धूतं (जा० भ०) गुणवान्, विद्वान्. राजा का प्रिय (जा० पारि०)
सूयं चन्द्र शुक्र- उत्तम धर्म कर्म में अरुचि, पराया कार्यं नाशक, व्यसनों में
तत्पर ( शंभु० ) । सुन्दर शरीर, शत्रुहंता, राजा के समान सुन्दर, वड़ा तेजस्वी, दाँतों
के विकार से युक्त (मान०) । पराया धन हरने वाला, व्यसनों में आसक्त- सतूकर्म में
रुचि से रहित ( जा० भ० )। परस्त्रीगामी, क्रूर, शत्रुओं से डरने वाला, धनिक
( जा० पारि० ) । .
सूर्य चन्द्र शनि-मू्ं, अति निर्धन, पराये इशारे जानने वाला, धातु क्रिया में
तत्पर, धूतं, व्यथं कष्ट करने वाला ( शंभु० ) । धर्म में तत्पर, दरिद्र, हाथी घोड़ों का
पालन कर्ता, सत्कर्म करने वाळा शक्ति रहित ( मान० )। पराये इङ्गित का जानने
चाला, धनहीन, मंद बुद्धि, धातु क्रिया में निरन्तर तत्पर, वृथा श्रम करने वाला, (जा०
र बुद्धि, मायावी देशप्रिय ( जा० पारि० ) ।
मंगल वुध--रूज्जा, पुत्र, घन, स्त्री जन और मित्र वर्ग से र
कठोर, विख्यात, साहसी, मंद कर्मो में प्रवीण ( शंभु० ) । सर्वत्र ह्न र