भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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नाभस आदि योग : ३९७

१९--समुद्र ( जलधि ) योग-द्वितीय २०--चक्र योग--लग्न से एकादशं भाव तक १-१ घर छोड़कर सभी गूह अर्थात्‌ १,३,५,७,९,११ इन भावों में गृह हों यह समुद्र का उल्टा है ।

(६) वजू, (७) यव, (८) कमल, (९) वापी योग पर बिचार प्राचीन ग्रंथों के अनुसार वस्न आदि योग लिखे गये हैं परन्तु सूर्य से चौथे घर में बुध तथा शुक्र कंसे हो सकते हैं सूर्य से बुध या शुक्र २८ अंश और ४८ अंश से अधिक दूरी पर नहीं हो सकते अर्थात्‌ सूर्य से बुध शुक्र दूसरे या तीसरे भाव से अधिक द्र नहीं हो सकते । भारतवषं में इन योगों का होना असंभव जान पड़ता है । कुछ विद्वानों का कहना है कि सूर्य से बुध शुक्र चौथे स्थान पर इस प्रकार हो सकते हँ कि सूर्य अंतिम २९ अंश के अंत में एक भाव में हो ओर २ राशि छोड़कर चौथे ठिकाने थोड़े अंश से बुध या शुक्र हो । २ संख्या योग--इसके ७ भेद हैं । पूर्वोक्त योगों में से कोई योग न हो तब इन योगों का विचार करना । १-वीणा (वल्ली-वल्लकी) योग यदि ७ स्थानों में सव ग्रह हों । २-दाम ( दमनिका-दामनी-रज्जू ) योग-केवल ६ स्थानों में सब ग्रह हों। ३- पाश योग = केवल ५ स्थानों में सब ग्रह हों । ४-केदार योग = केवल ४ स्थानों में संव ग्रह हों । ५-शूल योग = केवल ३ स्थानों में सब ग्रह हों । ६-युग योग = केवल २ स्यान में ही सव ग्रह हों ७-गोल (गोलक) योग-केवछ १ स्थान में ही सब ग्रह हों। विचार-संख्या योद की प्राप्ति में आकृति योग हो तो संख्या योग का फल नहीं दोगा आकृति योग का ही फल होगा । संख्या योग के भेद १. एक-एक ग्रह पृथक रहने से-७ भेद । २. २ ग्रह साथ रहने से -२३ भेद । ३. ३ ग्रह साथ रहने से -३५ भेद। ४. ४ ग्रह पाथ रहने से -३५ भेद । ५. ५ ग्रह साथ रहने से -२१ भेद । ६. ६ ग्रह साथ रहने से - ७ वंद । ७. ७ ग्रह साथ रहने से - १ भेद ।

योग १२७