भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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अध्याय ४

षड्वगे विचार

सप्त वर्ग से विचार---प्रहों के स्वरूप आदि के अनुसार फल समझना । (१) लग्न कुण्डली से-देह का :ख, आचार विचार, शरीर की आकृति आदि का विचार होता है। 2 a ह) होरा कुण्डली से--घन सम्पत्ति, विपत्ति, शील स्वभाव, सौख्य का विचार होता है ।

(३) द्रेष्काण कुण्डली से-किये हुए कार्यों का क्या फल होगा इसका ज्ञान, पदवीः- का, भाई बन्द का विचार । न (४) सप्तमांश से-भाइयों की संख्या का ज्ञान, भाई बहनों का, धन संचय का, पुत्र पौत्र का विचार ।

(५) नवमांश से-जातक के सब फलों का ज्ञान, वणे, रूप, गुण, अच्छी बुद्धि, पुत्रों और स्त्रियों का विचार ।

(६) द्वादशांश से-विवाहित पत्नी का सव हाल, आयु गौर माता पिता का विचार। (७) त्रिशांश से-कष्ट, मृत्यु का विचार, स्त्री का विचार । (१) होरा चक्र ( राशि का $ भाग ) प्रत्येक १५° का राशि मेष वृष मि० क० सि” कन्या तु० वृश्चि० धन मकर कुंभ मीन स्वामी

१२२३ ४ ५ ६ ७ ८ ९ १०११ १२

१५ ५ ४ ५ ४ ५ ४ ४५ ४ ५४ ५ ४ देवता छि ३० ४७ ४ ५ ४ ५ ४ ४५ ४ ५४५ ४ ५ पितर

(२) द्रेष्काण ( राशि का $ भाग ) प्रत्येक १०° का स्लट. राशि १ २ ३ ४ ५ ६ ७ ८ ९ १० ११ १२ स्वामी

वप १०तक१ २ र इ ३ क ४ ५ काज ६ STERN हँ २०,५ ६७ ८ ९

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