भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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'८२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

स्थान में हो तो अच्छे गुण प्राप्त हों सदा पबित्र रहे, प्रवीण, दयावान्‌, धनवान्‌, संतान

“युक्त, कीतिमान्‌, दीर्घायु और राजा सरीखा हो ।

(८) चन्द्र स्व या मित्र द्रेष्काण में हो-तो जातक, सतगुणी हो, देखने में सुन्दर

हो, चन्द्र उत्तम वर्ग में हो तो भाग्यवान्‌ हो । 9

यदि कोई दूसरे स्थान में हो तो जातक को वह गुण देवे जो उस ग्रह के हों

जिसके साथ चन्द्र पैदा हो ।

(९) जो ग्रह स्व द्रेष्काण में हो तो उसका कारक ग्रह उसे सब फल देगा ।

(१०) ग्रह अपने स्व या उच्च के घर में हो उसी समय मित्र ग्रह से युक्त या दृष्ट

हो तो वह धन युक्त राजा हो ।

(११) द्विस्वभाव राशि में द्रेष्काण-क्रमानुसार अधमा, मध्यमा, उत्तमा ।

चर राशि में द्रेष्काण-उल्टा क्रम-उत्तमा, मध्यमा, अधमा ।

स्थिर राशि मैं द्रेष्काण-अच्छा बुरा मिश्रित फल होगा ।

सप्तमांश फल |

(१) सप्तमांशेश चन्द्र युक्त या दृष्ट हो या सौम्य ग्रह से दृष्ट हो-सहोदर

भाइयों से युक्त, श्रढ़ती कांति, यश, उत्तम मित्र, अति प्रगल्भ । र (२) सप्तमांशेश सूर्य रहित जितने ग्रह नीच में बैठे हो उनमें जो सवसे वली हो- उसी के अनुसार उसकी भाइयों के निमित्त से चिन्ता युक्त स्थिति होती है । (३) उप्तमांशेश उच्च में या शुभ वर्ग में हो-राजा सम पुज्य, सव कार्यों में सफ- लता पावे, धन से अति सम्पन्न हो ।

“ (४) सप्तमांश में सहज भाव में सूर्य, गुरु या मंगल हो-तो अधिक लक्ष्मी को प्राप्त, मित्र को मृत्यु के पश्चात्‌ उसके पुत्र जन्मे हों । (५) युक्त स्थान में शुक्र, बुध या चन्द्र हों-कन्या का जन्म होता है । (६) स्व सप्तमांश में सभी ग्रह उच्च में हो-महा धनी हो । स्व सप्तमांश में सभी नीच क्षेत्र में हों-दरिद्री हो । (७) सप्तमांशेश-पाप ग्रह होकर पाप ग्रह के सप्तमांश में-वे क्रूर ( दुष्ट ) होते

हैं, बुरा फल देते हैं । शुभ ग्रह होकर शुभ ग्रद् के सप्तमांश में-उत्तम फल देते हैं । मित्र ग्रह हो तो -मिश्र फल देते हैं।

नवांश फल

राशियों के भिन्न भिन्त नवांश का फल झे

१-मेष लग्न में दृष्टि हो तो शुभ फल हो व परस्त्री पर (१) पहिला नवांश हो-चोरों का स्वामी, प्रेम करे ।

मुखिया अधिकारी हो । इस पर मंगळ की (२) नवांश हो-उपभोग करने वाळा