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सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

४४२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

होता है । (जा. पारि.)

२०-प्रवज्या प्रद ग्रह सूये शनि मंगल से युक्त हो तो धन पुत्र स्त्री से रहित सन्यासी हो ।

२१-शुभ नवांश में सूये हो और वह उच्च के अन्त भाग में स्थित ग्रह को देखता

हो तो वह युवा या बालावस्था में संन्यासी हो । (जा. पारि.)

२२-शुक्र और बुध बलहीन होकर लग्न को देखें तो दरिद्र हो । (जा. पारि.)

२३-कोई ग्रह उच्च राश्यंश में युक्त होकर चन्द्र को देखता हो तो भिक्षुक (संन्यासी) हो । ८

२४-बहुत ग्रह एक स्थान में होकर लग्न को देखें तो दीक्षित हो।

२५-जहाँ चन्द्र हो उस राशि के स्वामी को शनि या लग्नेश देखते हों तो दीक्षित

हो (प्रवज्या हों) ।

२६-यदि चन्द्रमा मंगल की राशि में हो शनि के द्रेष्काण में हो शनि उसे देखता . हो तो सन्यासी हो । :

२७-तवम भाव में चन्द्र हो उसे कोई ग्रह न देखता हो तो राजयोग में उत्पन्न

होने पर भी दीक्षित राजा हो (जा० पारि०) 1 अन्य विचार

२८-एक राशि में इस प्रकार ग्रह हो ।

सुर्य, चन्द्र, गुरु, बुध ) तो बल्कल धारी फल भोजी सन्यासी हो । या मगल, बुध, शुक्र शनि ? या चन्द्र गुरु शुक्र शनि ]

२९-चन्द्र क्षीण हो प्रवज्या योग हो लग्नेश चन्द्र को देखे तो जातक दुःखी तपस्वी, शोक तप्त, धन जन रहित, कष्ट से भोजन पाने वाला हो ।

३०-प्रवज्या योग में राजयोग होवे तो बुरा प्रभाव घट जायगा वह दीक्षित साधु शील राजा बना रहेगा जिसे सव नमन करेंगे । ३१-यदि ४ ग्रह जिनमें एक दशमेश भी हो केन्द्र या त्रिकोण में हो या ३ बल- चान्‌ ग्रह अच्छे घर में पड़ें हो तो वह सिद्ध सन्यासी होगा । ३२-भ्रवज्या कारक ग्रहों में अधिक शुभ ग्रह हों और अच्छे घर में हों तो उसका सव लोग मान करेगे। यदि ऐसा न हो तो उसका कोई मान न करेंगे । ३३-जव दशमेश ४ और ग्रहों के साथ केन्द्र या त्रिकोण में हो तो वह मुक्ति प्राप्त करेगा ।

३४-यदि राशि का अन्त उदय हो रहा हो और उसका स्वामी शुभ ग्रह हो गुरु कैन्द्र या त्रिकोण में हो तो भी मुक्ति प्राप्त करेगा । ३५-अवज्या योगों में शुभ ग्रहों से युक्त या दृष्ट न हो तो संन्यास लेने पर भंगहो जावे। ३६-अवज्या योग में ग्रह युद्ध में पराजित ग्रह की भी प्रवज्या भंग हो जायगी अर्थात्‌ वह फकीरी लेकर उसे छोड देगा । जितने ग्रह पराजित हैं उन सब की प्रवज्या छुटती जायगी केत्रल जीते हुए की प्रवज्या रहेगी ।

र छ

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