भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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ग्रहों की अवस्थाए और चन्द्र क्रिया : ९३

५. गुरु को १२ अवस्थाओं का फल

१ झथच--विद्वान, धनी, वहुत गुणी. बहुत वृद्धिमान । बलवान, मंद स्वर से बोलने

वाला, गौर वर्ण, बड़ी ठोडी वाला, अति शत्रु भय ।

२ उपवेशन-गरीब हो, बातूनी, ( वक्ता ) रोगी, पशु के दांत की चोट, दस्तकारी के

व्यौपार में योग्य, हाथी पाँव रोग, बहुत गवं वाला, राजा और शत्रु से

सुख पाने वाला, पैर जांघ मुख और हाथ में ब्रण । यदि २,३,११ या १२

घर में हो-तो बड़ी बुद्धि हो शास्त्र की अनेक शाखाओं में दक्ष हो 1

३ नेत्रपाणि-रोगो; धन होन, गीत ओर नृत्य प्रिय, कामी, गौर वर्ण, दीन वर्ण मनुष्यों

से प्रीत । लग्न में हो तो-अनो, सुन्दर, सिर का रोग हो, शंका युक्त, कोई

कार्य या व्यापार में असफल होने को संभावना । पैरों में सदा qo, यदि

६, ८ या ९ घर में हो-शत्रुओं का दमन करे ।

४ प्रकाशन-गुणों से आनंद, सुख, तेज, वृन्दावन आदि गमन, उच्च का हो तो मान्य

कुबेर सम धनी । लग्न या दशम में-राजा. का मंत्री हो, बहुमूल्य पदार्थ व

घन युक्त रहे ।

५ गश्नेज्छा-साहसी,. मित्र वर्गो से युक्त, पंडित, अनेक सम्पत्ति से युक्त, वेद

ज्ञाता । बिना विचारे काम करने वाला, सदा मित्र व पुत्रों के सुख से सम्पन्न

लग्न में हो तो विद्वान हो अन्य घर में हो तो गुप्तांग में रोग हो । यदि

२-५-७ या १० घर में हो तो आडम्बर हीन पापी और रोगी हो कृष्ण

वणं से पीड़ा हो, धनी हो, विदेश वास करे ।

६ गसन--शूर वोर हो, सर्प से भय, विविध कार्यों में संलग्न रहे परन्तु दूसरों के धन

से घनी हो | उस फे घर में जन समूह, सुन्दरी स्त्री और लक्ष्मी सदा रहे ।

७ सभावसति-तेज वक्ता हो, धनी, दानी, राजभक्त, विद्वान और देखने में सुन्दर ।

गुरु के समान वक्ता, मुक्ता आदि घन से परिपूर्ण, अनेक वाहनों से युक्त

अनेक विद्या का ज्ञाता । यदि केन्द्र में हो तो बहुत सुखी ओर घनी हो

परस्त्रो भोगे । ८ या १२ घर में हो तो दुःखी हो और नष्ट हो ।

८ आगसन-घामिक विद्वान, माननीय, शक्तिवान, घमंडो, तीर्थ घूमे, झोक में आदर,

अनेक बाहन, सेवक, पुत्र, स्त्री मित्र आदि से युक्त, उत्तम विद्या, राजा से

सन्मान, उत्तम बुद्धि, काव्य में प्रेम, सन्मार्ग, सुखी, सर्वत्र मान, राजा के

समान प्रतापी ।

q सोजन-नित्य उत्तम भोजन मिले, अनेक वाहन से सुशोभित, घर को लक्ष्मों कमी न

छोड़े, सदा पंडित : लग्न में हो तो प्रसिद्ध पुरुष हो, बहुत सुखी हो परन्तु

ब्यसना हो और मानने योग्य बात कहे, घनुर्घर हो । ५ या ९ घर म-सत

गुणो हो पुत्र हो परन्तु घन होन हो । गुरु पाप युक्त ५ या ९ घर में-पुत्र

संतति से रहित हो ।