सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 111, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ेंग्रहों को अवस्थाएँ और चन्द्र क्रिया : ९५
६ गसन--उत्साही, कला कोश में दक्ष, तोर्थ यात्रा का प्रेमी, टखने में रोग, घनवान,
हाथ पैर में रोग ।
७ सभावासति--राजा का मंत्री हो, घनी दक्ष परन्तु पीड़ा हो, उदय होकर बली हो तो
अपने प्रताप से राजदरबार में प्रगल्भता, गुणी, शत्र, का नाणक,
महावली, दाता और वाहन पर चलने वाला । यदि शत्र क्षेत्री या छात्र
युवत या दृष्ट हो-तो नाना प्रकार के रोग हों और नष्ट हो जावें ।
८ आगमन--घन लाभ नहीं होता, शत्रुओं द्वारा हानि, पुत्र और परिजन का वियोग,
रोग भय, स्त्री सुख की हानि । बुरे आचरण का, गरीब और वातूनी,
दाद का रोग, पुत्र शोक 1 शत्र, णकत या ६ घर में हो-अपनी सब सम्पत्तियां
विशेष कर अपनी संतान ओर स्त्री खोवे। यदि २, var ८ घर में
हो तो सब प्रकार से दुःखी हो।
१ भोजन--मजबूत, सतगुणी कार्य में मन, सेवा या व्यापार से धन, क्षुधा की कमी,
पित्तज पीड़ा, मस्तक पीड़ा, विदेश वास, पराई सेवा, कई प्रकार की आपत्तियां
- क्षूघा से व्याकुळ, रोग से पीडित, शत्रु से तंग, कन्याराशि में-घनवान ओर
पंडितों का आश्रित ।
१० नृत्यलिप्सा-काव्य करने वाला, वुद्धिमान, वीणा मृदंग आदि बाजा बजाने में निपुण,
घन को बढ़ाने वाला । वक्ता हो उसकी विद्या और कवित्त शक्ति दिन २
बढ़े । परन्तु नीच का हो तो वह अज्ञानी हो। यदि स्वस्थानी हो तो राजा
का मंत्री बहुत दृढ़ और कामी हो, कई स्त्री हों पर-स्त्री से मन काला हो,
बातुनी हो माननीय यज्ञ कर्ता और घामिक पूजा शादि करे 1
७. शनि की १२ अवस्थाओं का फल
१ शयन- बाल अवस्था में रोग, भूख प्यास से पीडित, बहुत बड़ा श्रमित परन्तु वृद्घा-
वस्था में भाग्य से सम्पन्न होता Š । शनि चाहे कहीं हो जिस शयन आदिं
अवस्था में बैठा हो उसो तुल्य फळ देता है । शयन में गुप्तांग में रोग, दोषित
अंग, पोता बढ़ जाने का रोग 1 लग्न, ६ या ८ घर में-निरंतर विदेश वास,
गरीब हो, कुरूप अंग मोटा, ५, ७, ९ या १० घर में-घामिक हो, पुत्र हो,
अपनी सम्पत्ति स्वतंत्रता पूर्वक वाँट सकता है । ;
२ उपवेशन-हाथीपांव रोग, दाद, सदा वीमार <ë, नित अपना घन गंवावे, प्रबल शत्र,
से पीड़ित, व्यथं खर्च, अभिमानी, राजा से दंडित ।
३ नेत्रपाणि -सुन्दरी स्त्री और सम्पत्ति से युक्त, राजा ओर मित्रों से उपकृत, बहुत
कलाओं का ज्ञाता, प्रिय वक्ता । इस अवस्था में अज्ञानी भी विद्वानों सरीखा
प्रसिद्ध हो, धनवान और बातुनी हो, २ स्त्री हो, उदर शूल, पेट ओर सिर
में रोग, अग्नि व जल से भय, ज़ोडों में पीड़ा हो, उसका क्रोध थोड़े समय