सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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श्री गणेशाय नमः
ज्योतिष-शिक्षा
तृतोय ( फलित } खण्ड
ध्याये पाये शक्ति जिन, पूवं ज्योतिषाचार॥
शिव शंकर सुमरन किये; कीना फलित विचार॥ १॥
उन्हीं भोलानाथ का, भजू गणप सह गौर ।।
सुमति शक्ति सामथं दो, होहु सहायक आर ॥ २॥
प्रबल तकंना-शक्ति दो, बढ़े त्रिकालिक : ज्ञान ॥
अनुभव और विचार से, बुद्धि होय बलवान॥ ३॥
दिव्य-दुष्टि दीजे प्रभू, धरूं तुम्हारा ध्यान॥
फित कथन प्रत्यक्ष हो, कुरा करो भगवान॥ ४॥
अध्याय १
राशि एवं नक्षत्र गुणघर्से
इस फित खण्ड का अध्ययन करने से पूवं इसका प्रथम ज्ञान खंड, एवं द्वितीय
गणित खंड अध्ययन कर लेना आवश्यक है जिसके पश्चात् इस तृतीय फरित खंड के _
अध्ययन में सुगमता प्रतीत होगी ।
फलित ज्योतिष अध्ययन करने के लिये प्रारम्भ में जो बातें जानने योग्य हैं
यहाँ पहिले ही दे दी गई हैं और स्थूल रूप से फल का संक्षिप्त विचार भी पहले दै
दिया गया है ।
पृथक्-पृथक् प्रसंग आने पर विषयों को समझाने के लिए कई स्थानों में पुनरा- र
वृत्ति भी हो गई है और कहीं-कहीं भिन्नता ( मतभेद ) भी जान पड़ेगी, परन्तु ये सब, . ह
बातें अध्ययन कर लेने पर आगे फल विचारने में बहुत सहायक होंगी। किसी-किसो —
प्रसंग में अच्छा और बुरा दोनों प्रकार का फल बताया है, इस पर अच्छी परिस्थिति,मे |
अच्छा फळ, बुरी परिस्थिति में बुरा फल ग्रहण करना । >
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