सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 22, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ें६ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
राशियों का स्वभाव
१ श्रेष साहसी, अभिमानी, मित्रों पर कृपा रखने वाला । यह पहले नवांश में अपने
स्वभाव को विशेष रूप से प्रकट करता है 1 यह पाटल देश का स्वामी है ।
३ युष-स्वार्थी, समझ-वूझ कर काम करने वाला, परिश्रमी; सांसारिक कार्यों में दक्ष,
पंचम नवां में यह स्वभाव पूर्ण रूप से प्रगट होता है । कर्नाटक ( मैसूर)
आदि देशों का स्वामी ë ।
३ मिथुन-विद्याष्ययनी, शिल्पी, पंचम नवांश में पुर्ण प्रभाव प्रकट हो । यह चेरा
देश का स्वामी है ।
४ कर्को सांसारिक उन्नति में प्रवृत्ति, लज्जावान, कार्य करने में स्थिरता, समय
अनुयायी का सूचक है 1 पहले नवांश में पूर्ण प्रभाव हो। चोल देश का स्वामी ।
५ सिह-मेष के समान स्वभाव, परन्तु स्वतंत्रता प्रेमी और उदार चित्त । पंचम
नवांश में पूरा प्रभाव । पांड्य देश, त्रिचनापल्ली, मदुरा, तंजौर, विजगा-
पट्टम आदि का स्वामी । d
६ 'कन्या-मिथुन का-सा स्वभाव, परन्तु अपनी उन्नति और मान पर पुर्ण ध्यान,
नंबम नवांद में पूर्ण प्रभाव, केरल, (त्रावनकोर) देश का स्वामी ।
७ तुला-विचारशील, ज्ञानप्रिय, कार्यसम्पन्न और राजनीतिज्ञ । पहळे नवांश में पूर्ण
प्रभाव । कोल्लास देश का स्वामी ।
६ वृश्चिफ-दंभी, हठी, दृढ्-प्रतिज्ञ, स्पष्टवादी, निर्मल चित्त । पंचम नवांश में-पुरा
प्रभाव । मलय देश (त्रिचनापल्ली और कोयंबटूर) का स्वामी ।
९ घन-अघिकार-प्रिय, करुणामय, मर्यादा का इच्छुक । नवम नवांश में पूरा प्रभाव ।
सेंघव (सिंघ) देश का स्वामी ।
१० मकर-उच्च पदाभिलाषी । प्रथ तवांश में पूरा प्रभाव | पंचाल देश (उत्तर
प्रदेश का मध्य भाग) का स्वामी ।
११ कुम्भ-विचारशोल, शांत चित्त से नई बात पैदा करने वाला, घर्मारूढ़, पंचम
नवांश में पूर्ण प्रभाव । यवनदेश (कश्मीर से काबुल तक) का स्वामी 1
१२ मोन-स्वभाव उत्तम, दानी, कोमल चित्त । नवम नवांश में पुर्ण प्रभाव । कौशल
- देश (संयुक्त प्रान्त का पुर्व भाग जिसकी राजधानी अयोध्या थी) का स्वामी ।
द्रव्य आदि के ज्ञान में राशियों का अंश
राशि-मेष वृष मिथुन ककं सिंह कन्या तुला वृश्चिक धन मकर कुंभ मीन
अंश-१० २४ २८ ३२ ३६ ४० ४० ३६ ३२ २८ २४ २० ये केवल नष्टादि द्रव्य चिता, द्रव्य परिज्ञान, पुरुष अवयव ज्ञान आदि के किये . हैं॥ इसे पूर्वाद्धे के ५-६-७-८-९-१० को ५४० पल = २००-२४०-२८०-३२०-३६०
“४०० पल लेना