भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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. ३२ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतोय फलित खण्डं

सम्बन्धियों का ज्ञान शुभाशुंभ भांव

१ आजा, २ पितृ पक्ष, ३ भाई वहिन, १ शुभ, २ अशुभ, ३ शुभाशुभ, ४ नौकर, ४ माता, स्वसुर, ५ संतान, ६ शुभ, ५ शुभ, ६ अशुभ, ७ साधारण काकी, मातृ पक्ष, ७ आजी, तीसरी अशुभ, ८ अशुभ, ९ शुक्त, १० शुभ, ११ माई वहिन, ८ कुटुम्ब स्थान भार्या पक्ष शुभाशुभ, १२ अशुभ 1 ९ चौयाभाई साला बहुनोई, १० पिता

सास, ११ दमाद, बहू, मित्र, १२ काका मामी 1

अध्याय ३

ग्रह, उनके नाम ओर गुण-धर्स

(१) सूर्य-हेलि, भानु, भान, दीप्तरदिमि, चंडांशु , भास्कर, अहस्कर, तपन, दिनकृत,

पुषा, भरुण, अक ।

(R) चल्रमा-सोम, शीतररिम, शीतांशु, ग्लौ, मुगांक, कलेश, उडुपति, इन्द्र, शीतद्युति ।

(३) संगल-आर, वक्र, आवनेय, कुज, भोम, कूर, लोहितांग, पापी, क्ूरदुक क्षितिज,

रुधिर, अंगारक ।

(४) बुष-वित्त, ज्ञ, सौम्य, बोघन, चंद्रपुत्र, चांद्रि, शांत गात्र, अतिदीघं, इन्द्रपुत्र, विद्य,

तारमियन, हेमन ।

(५) गुरु-जीव, अंगिरा, देवगुरु, प्रशांत, ईज्य, त्रिदिवेश, बंच, मंत्री, वाचस्पति, सुरा-

चायं, देवेज्य, जीव, सुरगुरु ।

(६) शुष्र-भृगु, उशना, भार्गव सुत, आच्छ, काण, कवि, दैत्यगुरु, सित, काव्य, भुगसुत,

दानवेज्य, आस्फुटित ।

(७) शनि छायात्मज, पंगु, यम, अकंपुत्र, कोण, असित, सौरि, नील, क्रूर, कशां,

I कपिलाक्ष, दीर्घ, छायासुनु, तरणि तनय, आकि, मन्द ।

ु (८) राहु-तम, असुर, अग, सं हिकेय, स्वर्भानु, विघुंतुद, सर्प, फणि 1 ) केतु -शिखी, घ्वज, शनिसुत, गुलिक, मांदि, यमात्मज, प्राणहर, अतिपापो, ।

Sa. Ca. «०० 2