भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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३६६ : ज्योतिष-शिक्षा, तुतीय फलित खण्ड

चन्द्र का विशेष फल--पाप युक्त चन्द्र-माता का नाश करता ë । पाप युक्त सूर्य￾पिता का नाश करता ë मिश्रित से मिश्चित फळ होगा ।

चन्द्रमा जन्म में शुभ युक्त हो तो--भूमि, यश, घन, कुल में श्रेष्ठ, श्रेष्ठ कोति,

प्राप्त हो ।

चन्द्र से केन्द्र में -गुरु, बुध, शुक्र में से कोई हो-स्वतंत्र जीवन व्यतीत करे।

चन्द्र से २-१२ घर मे--गुरु, वुध, शुक्र, में से कोई हो--स्वतन्त्र घन्धा करे ।

चन्द्र से ३-११ घर में--गुरु शुक्र हो तो स्वतंत्र धन्धा करे या उच्च ओहदे पर रहे।

चन्द्र से दशम स्थान में भिन्न भिन्न ग्रहों का फल

१-सूर्यं हो-सिद्ध कर्म, घनो, सात्विक गुण, राजा के तुल्य, दुष्टजनों का आश्रय ।

२--मंगल हो-म्लेच्छदेश में वास, विषम स्वभाव, लोभी, क्रूर साहसी, चंडाळ सम

आचरण ।

३--बुघ हो-बहुत पुत्र, घ्म कार्य में रत, विद्वान्‌, कला जाननेवाला, धनी, पडित,

विख्यात ।

४--गुरु हो-शुम आचरण, विशुद्ध घन वाला, समृद्ध , धर्मात्मा, राजा व मंत्री हो!

५--शुक्र हो-सिद्ध कार्यकर्ता, घनवान्‌, सुन्दर, ऐश्वर्य सम्पन्न, राज पूजित । ,

६--शनि हो-व्यानि युक्त, दु-खी, निर्धन, बुद्धि होत, कार्यों में नित्य उद्विग्न ।

चन्द्र के अंग का फल

चन्द्र स्वनवांश, मित्र या अधिमित्र नवांश में हो, दिन का जन्म हो और गुरु की

दृष्टि हो, रात का जन्म हो और शुक्र की दृष्टि हो तो सुखी और घनवान्‌ होता दै इसके

विपरीत हो तो निर्धन या अल्प घन हो ।

सूर्य के स्थान से चन्द्र का फल

सूर्य से चन्द्र- केन्द्र में हो तो-मूखं दरिद्री हो!

पणफर २-५-८-११ में-मध्यम फल ।

आपोक्लिम ३, ६, ९, १२ में-उत्तम फल ।

सूर्य से दशम में भिन्न-भिन्न ग्रहों का फल

दशम में चन्द्र हो-हिपक, मंगल हो-क्षुद्र, बुध होऱ कुकर्म कर्ता । गुरु हो-काम,

रोगी, शुक्र हो-बहुत से शोक वाला, शनि हा-रक्ष। कमं करने वाला 1

ग्रहांश कोष्ठक--(ग्रहांश के विचार से फल का समय) ।

जन्म लग्न या जन्म राशि के अंशों पर से ग्रहों के रायन्तर होने पर वे कितने

समय के बाद फल देंगे यह जानने का चक्र ।

ग्रह को एक राशि ३०० भोगने में इतना समय लगता ë तो १० भोगने में कितना

समय लगेगा । यही गणित ते निकाल कर चक्र में दिया हैं ।