सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 415, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ेंभावेश का भिन्न-भिन्न भावों में फल : ३९९
चोर हिर भय से मृत्यु (मान०) 1 कुरण और चतुर वाणी, शत्रुओं के लाम का लि मंगल हो तो-राजा, चोर, अग्नि इन से उत्पन्न भय से घन कष्ट (जा० सं०) । सुकाय॑ में ख करने वाला, घर्मात्मा, प्रिय ववता, गुणो, सुखी (qo पा०) ।
Í ३--सहज में व्ययेश-क्रूर ग्रह-भाई बन्धु से रहित, शुभ हो-धनबान्, थोड़े भाई
र ग अ भाई वंदों से दुर रहने वाला (मान०) 1 बिना बांधव वाला
उच भसे गुद होते पर थोड़े भ्राता, प कृपण तना भ्राताओं मे सदा गा दूर दू रहे रहे । (जा० सं०)। i भाई के '
ses में व्ययेश-वड़ा कृपण, सत्क्रमं करने वाला, लड़के से मृत्यु पाने वाला,
'महा दुःखी, कृपण, रोगहीन, अच्छे कर्म करने वाला, निरन्तर महा दु खी होकर पुत्र से
मरण प्राप्त (जा० सं०) । माता घर वाहून आदि के सुख से होन ° बट) || Š
पंचम में व्ययेश-पुत्र से रहित, शुभ गृह हो तो पुत्रों से युक्त । पिता का घन
भोगने वाला, अपने सामथ्यं से रहित (मान०) । (जा० सं०) । संतान और विद्या से
होन, पुत्र के लिये खच तीर्थं ब्रत करने वाला (वृ० पा०) ।
६--पषष्ठ में व्ययेश-क्रर ग्रह, कृपण, नेत्र में दूषण (काना आदि), मरने योग्य,
शुक्र हो तो नेत्र बिहीन (अम्बा) (मान०) + (जा० सं०) 1 अपने परिजन का वेषो, क्रोघी,
पापी, दु:खी, पर स्त्रीगामी (qo पा०) 1
७--सप्तम में व्ययेश-क्रर ग्रह, दुःशोल, दुष्ट कमंकर्त्ता, पटु भाषी, स्वस्त्री से मृत्यु,
शुभ ग्रह हो तो वेश्या के निमित्त से मृत्यु (मान०) । दुष्ट, खोटे कमे करने वाला, कपट
वचन । पाप ग्रह हो तो स्त्रोहीन । शुम ग्रह, वेश्या से नाश को प्राप्त (जा० सं०) ।
स्त्री के लिये खर्च करने पर भो सुखी नहीं होता, बल और विद्या से हीन (qo पा०) ।
८--अष्टम में व्ययेश-अष्ट कपाली, कार्य साधन से रहित, सबका द्रोही, शुभग्रहघन संचय करने में तत्पर (मान०) । दरिद्रता युक्त, कार्यों का साधन करने वाला,
परिणाम से हीन, सबसे वेर बुद्धि । शुभ ग्रह हो तो घन संग्रह में तत्पर (जा० सं०) 1
अधिक लाभ करने वाला, प्रिय वक्ता, मध्यमायु, सब गुणों से युक्त (वृ० पाः) ।
९--नवम में--तीर्थो के दर्शन को घूमने वाला । कूर ग्रह-दरब्य निरर्थक पापी
मनुष्यों से खराब होता है (मान०) । जीविका या तीथं दर्शन में खर्च । पाप ग्रह हो तो
पापी होता है उसका घन व्यर्थ ही खर्च होता है (जा० सं०) । गुरु और मित्रों से द्वेष
करने वाला, स्वार्थो (qo पा०) 1
१० दशम में-स्त्री से पराङ्मुख, पवित्र शरोर, स्वपुत्रों के लिये धन संग्रह करने
में तत्पर, माता दुर्वाक्य कहने वालो (मान०) । पर स्त्री से पराङ्मुख, पवित्र शरीर
वाला, पुत्र घन इनके इकट्ठे करने में तत्पर, उसकी माँ खोटे वचन बोलने वाली (जा०
सं०) । राजद्वार से घन का खर्च, पिता से स्वल्प सुख (ब्? पा०) ।
११--छाभ में-धन का पालन करने वाला, दीर्घायु, अपने स्थान में सबसे श्रेष्ठ,
दानी, सत्र विख्यात, सत्य भाषी (मान०) । सुकुमार तथा बड़ी आयु वाला, स्थान में
श्रेष्ठ, दानी, विख्यात, सत्यभाषी (जा सं०) । अल्प लाम और कदाचित् दुसरे का घन
लाम होता है (qo पा०) ।
रू
FE CE