भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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सचित्र ज्योतिष शिक्षा

; बी० एल० ठाकुर : š

ज्योतिष के अधिकतर ग्रन्थ संस्कृत में ही हैं । किन्तु संस्कृत से अनभिङ्ज व्यक्तियों के लिए >

` इस माध्यम से यका अध्ययन कठिन Š । इसलिए हिन्दी में एक्‌ ऐसी पुस्तक की

` आवश्यकता थी, जिसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति ज्योतिष का सरलता से अध्ययन कर

x

सके? ::

इस प्रयोजन को ध्यान में रखकर ही प्रस्तुत पुस्तक सात खण्डों में प्रकाशित की गई है ।

यसात खण्ड प्रारम्भिक ज्ञान, गणित, फलित, वर्ष-फल, प्रश्न मुहूर्त तथा संहिता खण्ड हैं ।

“प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड: इस खण्ड के अध्ययन से ज्योतिप-सम्बन्धी वहुत-सी बातें समझ

में आ जाती हैं, जैसे किसी का जन्म, सम्वत्‌, मास, पक्ष, दिन, समय आदि ज्ञात न

| । : हो, तो केवल कुण्डली-चक्र देखकर सभी बातें बताई जा स्ती हैं । बिना पंचाङ्ग

i रथि नक्षत्र, करण, वार, सूर्य, चन्द्र आदि स्पष्ट बताए. ज,: :झते-हं । रल इसी

भाग के अध्ययन से संक्षि जन्म-पत्तिका बनाई जा सकते अन्त म.फलित- ,

सॅप्बन्धी मुख्य-मुख्य बातें संक्षेप में बताई गई हें २. ५४००-7४ uu

गणित खएड: इसके दो भाग हैं । इसमें पूरी जन्मपत्री बनाने की :; प्र है प्रर ? गणित. ।

| करने की सोदाहरण रीति देकर पूरी गणित-प्रक्रिया दी गई; .। 7.13 |

u: प्रथम भागः ९०; ; द्वितीय: श; ४० I

Md प्रथम भाग: इसमें फलित-सम्बन्धी बातें दी गई. -.5 Sisi से उदाहरण देकर समझाया गया है। |:

हरि भागः इसमें ग्रहों की दृष्टि, योग, वर्ग s: ज्योतिष के आवश्यक

क us पुर सूक्ष्म विवेचन किया गयाहै। . (अ) ८५; स). १४०

शि भागः इसमें विस्तृत दशा-विचार से सांथ भाग्य, धर्म, कीर्ति विद्या, बुद्धि,

0 दु:ख आदि विषयों पर विचार प्रकट किया गया| है, माता-पिता, भाई-बन्धु

“आदि सम्बन्धो पर ग्रह-प्रभाव का ज्ञान प्राप्त करने के लिए इस ग्रन्थ की उपादेयता |

: 00 ०७] अनुपम है I 24 qu

४, = फल खण्डः इसमें वर्ष-फल बनाने का पूरा गणित उदाहरण देकर समझोया गया

1०9, स्ट l

3६८४00: इसमें प्रश्‍न-ज्योतिष सम्बन्धी बातें दी गई हैं और किसी प्रश्न का उत्तर देन

३ कै, अभ्यास उदाहरण देकर समझाया गया है। । ४०

इसमें राष्ट्रीय ज्योतिष-सम्बन्धी विषयों पर विस्तार से विचार किया गया

|

k र 'है॥ अनुकूल अथवा प्रतिकूल परिस्थितियो के अनुसार देश या नगर कौ राशि स्थिर

Š करने के प्रकार बताए गए Š .। किसी भी देश के भविष्य की जानकारी के लिए । 5 ज्योतिर्विद्‌ इस खण्ड का सफल उपयोग कर सकते हैं । भविष्यवाणी में प्राच्य और

S ~. Tamara दोनों रीतियों का च कम सारगर्भित वर्णन है । स्या | ६५

७ errs मो

ली वाराणसी पटना बंगलोर मद्रास

मूल्य; रू० ८५ कन

तीलाल बनारसीदा.स