सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 13, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ेंवर्षे साधन : ५
( अहगंण--३ वर्ष आरम्भ अह +३ )+छब्धिब )+ ळब्धि ब उनाह क
( वर्षं आरम्भ अहर्गण +उनाह क» ) ॐ ३०=लब्धि=मास गण
शेष +-१ वर्ष प्रवेश तिथि ( शुक्ल प्रतिपदा से तिथि गिरने )
(मास गग > २_)+६६_ुञ्चि इ
९२८
( मास गण गण? २ तेन = लब्धि सडे डः_ वध ड
(मास गण - खब्धि ई ) + १२=ब्धि गताब्द समूह
= शेष वर्षे प्रवेश का गत मास (चैत्र शुक्ल १ से गत मास गिनो )
गताव्द समूह् + ११०५वर्ष प्रवेश का शालिवाहन झाका ।
जन्म के अहर्गण से वषं प्रवेश निकालने का उदाहरण
जन्म का ग्रह लाघवीय अहुर्गण
२६०१ ४०१६
- १२३११३ % ३३ चक्र
= १५७१४ १२०४ब
--अ० १३२५२८ १२०४८ _
्रह्मतुल्य अहगंण=२५८२४२ दिन १३२५२८ अ०
+इष्ट १५-५१-४२॥
सावयव ब्रह्मतुल्य अहगेण =दिन घ० प० वि०
२५८२४२-१५-५१-४२॥
नब गतान्द < सौर वपं प्रमाण ९०३५४-२९२४
योग वर्ष आरम्भ का सावयव = ७८६९६-४५-१५-४२॥ ब्रह्म तुल्य अहगेण
अहगेण २७८६९६-‡-७=शेष ५ दिनम्मंगल ( आदि वार शुक्रवार से गिनना )
वर्ष प्रवेश मंगलवार को इष्ट घ० प० वि० पर होगा
२५-१५-४४
ब० गताब्द ५ सौर वर्ष प्रमाण उपरोक्त का गणित
वषं प्रमाण दिन-घ०-प०-वि०
३६५-१ ५०३१-३० > गत वर्ष ५६