सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंवर्ष साधन : ९
वर्ष वार घटी पल विपल तिथि यो०न० लग्न
९६ १ ५० २४ ०
९७ ३ शर प् ३०
९८ है; २१ २७ ०
२९ प्र २६ पर्द ३०
"१०० द् ५२ ३० ०
वर्ष प्रवेश सारिणी बनाने की रीति
एक सौर वर्ष में दिन-घड़ी-पलू-विपल होते हैं। ३६५ दिन को ७ वार में
३६५-१५-३५-२०
विभक्त करने से ५२ सप्ताह गत होकर शेष दिन-घड़ी-पल रहता है। अर्थात् प्रत्येक
१-३१-३०
वर्ष इतना बढ़ता है । इस कारण प्रत्येक वर्ष के वार में १, घटी में १५, पल में ३१
और विपल में ३० जोडते जाने से यह सारिणी बन जाती है। इस प्रकार प्रत्येक
वर्ष का वार घटी पल विपल प्राप्त हो जाता है ।
तिथि में ११, योग में १०, लग्न में ३३ जोड़ने से वर्ष प्रवेश की तिथि योग
नक्षत्र आदि प्राप्त हो जाते हैं, जिन में कभी-कभी अल्प अंतर पड़ जाता है । परन्तु
मुख्य बात विचार की वार ही है । इष्ट वार में कभी-कभी ये योग नक्षत्र कभी एक
आगे कभी एक पीछे भी आ जाते हैं । परन्तु उन सव से इष्ट दिन का ठीक स्थान
निश्चित हो जाता है।
सारिणी द्वारा वषं प्रवेश निकालना
गत वर्ष के सामने दिया हुआ वार घटी पल आदि लेकर उसमें जन्म का वार
'बटी आदि जोड़ देने से वपं प्रवेश का वार घटी पल आदि निकल जाता है।
वार घटी पल विप
जैसे गत वर्ष ५६ का सारिणी अंकर ०२९-२४०
- जन्म का = ३-१५-५१-४२/
वर्ष प्रवेशका =३- ५-१५-४२”
इस सारिणी द्वारा सरलता से वर्ष प्रवेश का वार और इष्ट निकल आता है।
वर्ष प्रवेश की तिथि नक्षत्र योग का अनुमान करने को आगे दो चक्र 'दये हैं ।
उनसे जाना जा सकता है ।
वर्षे प्रवेश की मास तिथि जानना
उपरोक्त प्रकार से वर्ष प्रवेश का वार और इष्ट निकल आता है। परन्तु १२
महीनों से किस मास की कौन तिथि आदि को यह वार प्रवेश का समय होगा जानने
की आवश्यकता पड़ती है जिससे उस समय की कुण्डली बनाई जा सके । इसके लिए
नीचे लिखी रीतियाँ हैं:--
(१) सूर्य स्पष्ट जन्म का जो हो वही राशि अंश कलादि जिस महीने का जिस
तिथि की हो यदि उस दिन वर्षे प्रवेश का वार मिल गया तो उसी दिन वर्ष प्रवेश