सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंलघुपञ्चवर्गी : २९.
दिन का अंत होकर रात्रि आरम्भ हो जाती है । अब चक्र देखा । प्रवेश लग्न वृश्चिक
का रात्रि स्वामी शुक्र दिया है । इस कारण त्रिराशीशा शुक्र हुआ ।
(५) समय पति
वर्ष प्रवेश दिन में = सूर्य राशि पति वर्ष प्रवेश रात्रि मेर चन्द्र राशि पति
जब वर्ष प्रवेश हो तो वर्ष प्रवेश के समय अनुसार वर्ष लग्न निकालकर वर्ष
कुण्डली वना लेना । फिर उस कुण्डली में देखना सूर्य और चन्द्र किस-किस राशि पर
हैं । यदि वर्ष प्रवेश दिन में हुआ है तो सूर्य राशीश ( सूर्यं जिस राशि पर है उस
राशि का स्वामी) समय पति होगा । यदि वर्ष प्रवेश रात्रि में हुआ है तो चन्द्र
राशीश (चन्द्र जिस राशि का स्वामी है) समय पति होगा । जैसे वर्ष प्रवेश का लग्न
वृश्चिक है। इस पर से वर्ष प्रवेश के समय की ग्रह स्थिति पर से लग्न कुण्डली
बनाई गई वह वर्ष प्रवेश की कुण्डली कहलायगी । मान लो उस वर्ष प्रवेश कुण्डली
में कन्या का चन्द्र और मीन का सूर्य है। देखा अपना वर्ष प्रवेश रात्रि में हुआ है ।
इस कारण चन्द्र की राशि का स्वामी समय पति होगा । यहाँ चन्द्र कन्या राहि का
है । कन्या राशि का स्वामी बुध होता है तो बुध समय पति हुआ ।
मास प्रवेश और दिन प्रवेश के समय का भी पञ्च पञ्च वर्गी अधिकारी
निकाला जाता है, परन्तु मास प्रवेश में ६ और दिन प्रवेश में ७ अधिकारी होते हँ
जिसका वर्णन आगे दिया है।
अब वर्ष प्रवेश की कुण्डली बनाने के लिए ग्रह स्पष्ट कर लग्न स्पष्ट और भाव
स्पष्ट करके वर्ष प्रवेश कुण्डली बनाते हैं । ग्रह स्पष्ट लग्न स्पष्ट और भाव स्पष्ट
करने की रीति ज्योतिष शिक्षा के गणित खण्ड में बता चुके हैं । ७
अध्याय ६
९ ~ र. वर्ष प्रवेश कुण्डली वनान को ग्रह स्पष्ट
वर्ष प्रवेश शाके १५६७ सम्वत २००२ चैत्र कृष्ण २ मंगलवार इष्ट ४९घं०-१५
प०-४२”-वि० दिनांक १९ मार्च १९४६ ई० है । उत्तरायण, वसन्त ऋतु। इस समय
का ग्रह स्पष्ट करते हैं । पंक्तिस्थ ग्रह जबलपुर के लोकविजय पंचांग से ।
फाल्गुन शुक्ल १५ रविवार की पंक्ति ; चन्द्रःसोमवार को=उ० फा०=,
पे 4 11) रा ० > विकन
१ सूयं ११-२ -४८-५० गति ५९-४९ मंगलवा र=हस्त १६-२६
२ मंगल २-२२-२१३२ , १९-२६ बुधवार =चित्रा ३३-३९
३ बध ११-१६-३३-५९ ,, १०३-५ मंगलवार-चैत्र कृ०२ के ५१-२३
४गरझ ६- ५-५९-५५ ,, श२८ वक्री उपरांत तुला का चन्द्र हे
शू शुक्र ११-१४- ९-१३ र ७५-१७ उदय| मंगलवार को द्वितीया ४९-१ हि
६ शनि २-२६-१६-४० ,, ०-४१ चक्री | है मंगलवार को प्रातः रवि११-
७ राहु. २- २-२३-३१ „» ३-११ -४८/-४” है गति ५९-४४ है । .