सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 55, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ेंवृहत्पंचवर्गी वल साधन : ४७
ग्रह के स्वस्थान
ग्रह सूर्यं चंद्र मंगल बुध गुर शुक्र हानि
राशि श्र ¥ १-८ ३-६ ९-१२ २-७ १०-११ {२) उच्च बरू
ग्रहो के उच्च और नीच राशि अंश का चक्र नीचे दियः है।
ग्रह सूर्यं चंद्र मंगल वुध गुरु शुक्र शनि उच्च राशि मेष वृष मकर कन्या कर्क मीन तुळा
रा० रा ० रा० रा० रा ० रा० रा०
परमोच्चराऽअंश ०-१० १-३ ९-२८ ५-१५ ३-५ ११-२७ ६-२० नीच राशि तुला वृश्चिक ककं मीन मकर कन्या मेष
रा ० रा० रा० रा ० रा० रा० रा ०
परम नीच रा०भंश६-१० ७-३ ३-२८ ११-1५ ९-५ ५-२७ ०-२० उच्च बळ साधन
उच्च और नीच बल का मंतर ६१८०० है । इसका बिश्वा बल निकालने को
९ का भाग देने से उच्च बल निकल आता है। १८००-९२०1 इस प्रकार ग्रह
पूणं उच्च होने पर २० विश्वा बल पाता है। वीच के अंश का वल अनुपात से
निकाला जाता है । यह रीति केवल वर्ष में उपयोगी है, जातक में नहीं।
(ग्रह् स्पष्ट ग्रह नीच)=शेष, यदि शेष ६ राशि से अधिक हो तो पड़भाल्प करना
पड़ता है। अर्थात् उस १२ राशि में से घटा देने से ६ राशि से कम हो जाता है ।
यही पडभाल्प क्रिया है ।
यदि ग्रह से नीच घटाने पर ६ राशि से कम वचे तो उसे पड़भाल्प करने की
आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि वह ६ से कम है। इससे १२ राशि में नहीं घटाना
पड़ता । ग्रह की राशि से नीच की राशि बड़ी होने के कारण न घट सके तो ग्रह की
राशि में १२ राशि जोड़कर उप्तमें से नीच की राशि घटाना । इस प्रकार शेष की
शुद्धि करने के उपरांत राशि के अंद्यादि बनाकर ९ का भाग देना तो कला विकला
में उच्च बल प्राप्त होता है ।
उच्च बल सायन का उदाहरण
(१) सूर्यस्पष्ट ११-५-३३'-७” ४-२५-३ ३-७” नीच ६-१०-२-० के अंश 1४५-३३-७ -+- ९८१७-१०” उच्चबल
शेष= ४-२५-३३-७
(२) चंद्र ५-२८0-४९-५” १२९-०-०/-०”
नीच ७-३ -२ =° १९-२५-४९-५
शेपः=१०-२५-४९-५ शेष=१¬४-१०-५५
यह ६ से अधिक है ८३४-१०-५५/ -<- ९=३'-४७/' उच्चबल