सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें७२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वर्षफल' खण्ड
(४) बुध स्पष्ट ११ रा-१७०-२-१५”
बुध की सारिणी से कला की सारिणी से ११र-१७९-०*.-१३/-२० ११रा-१७१-०-१३-२०/” २/-०-१३//-२० २ -१५”=+ ० -१५
आगे १८ का अधिक है १५४८ १ -४०-० =:-१३-३५
चालन + =० -१५ - ०-० वुध का उच्च वल
चालन + ०-१३-३५”
(४) गुरु स्पष्ट ६रा-५०-४४'-५२”
गुरुकीसारिणीसे कलाकीसारिणीसे ६्रा-५०=१०'-०'-०
६ रा-५०=१ SESS ४४-४५ ३ LU 0 ४४ --५२/-४-४९-६-४०ऋण
आगे का काम चालन ऋण ५२/-५ -४६ -४० शेष=९-५५-०-५३-२०
=५-५९-६-४० गुरु का उच्चबल
चालन ऋण ९-८५-० (६) शुक्र स्पष्ट ११ रा-१६०-५५'-११”
शुक्र की सारिणी से कला की सारिणी से ११रा-१६°=१८'-४६/-४०
११-१६°=१८-४६-४० ५५=६/-६”-४० १५-११”= ६०७-५३+
, आगे का अधिक + ११”= १-१३-२० २:१०५-५२-४७-१३
=६-७-५३-१० शुक्र का उच्च बल
चालन + १६-५२-४७” (७) शनि स्पष्ट २-२६-१४४७
शनि की सारिणी से कला की सारिणी से २रा-२६०=७'-२०”-०
२रा-२६=७-२०-० १४-१” ३३-२० १४-४७” १ -३८-३३+
आगे का अधिक+ ¥७”= ५-१३-२० =७-२१-३८-३३
=१-३८-३३-२० शनि का उच्च वल
चालन + ७'-२१”-३८
उपरोक्त उदाहरण से प्रकट होगा कि जिसका उच्चबळ निकाला जाता है एक वर्ण कम निकलता है । अर्थात् अंश का कलादि में, कला का विकलादि में और विकला का प्रतिविकला आदि में उच्चबल निकलता है। यहाँ विकला तक का उच्चबल निकाल कर + किया है इस कारण पूवं प्राप्त उच्च वल की प्रतिविकला में सिर्फ कुछ अन्तर है । क्योंकि वहाँ विकला का उच्चबल छोड़ दिया गया हं । साधारण प्रकार से विकला का उच्चत्रल निकालने की आवश्यकता भी नहीं है। क्योंकि उच्चवल में केवल कला विकला ले लिया जाता है प्रतिविकला छोड़ दिया जाता हूँ । .
टिप्पणी-यह ध्यान रहे कि वर्ष फल में उच्चवल साधन की सारिणी और गणित खण्ड में ग्रह बळ साधन में दी हुई उच्चबछ साधन की सारिणी में बहुत