भारतकोश
श्रीमद्भगवद्गीता साधक-संजीवनी (परिशिष्टसहित)

श्रीमद्भगवद्गीता साधक-संजीवनी (परिशिष्टसहित)

Shrimad Bhagavad Gita Sadhak Sanjeevani

स्वामी रामसुखदास द्वारा

स्रोत: संवर्धित नब्बेवाँ संस्करण (90th Edition), गीता प्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस, गोरखपुर · 2008 (उद्गम)

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( ज )

श्लोक-संख्याविषयपृष्ठ-संख्या
(विशेष बात २७६; मार्मिक बात २८१; विशेष बात २८७; अवतार-सम्बन्धी विशेष बात २८९; मार्मिक बात २९८; विशेष बात ३०४)
१६—३२कर्मिके तत्त्वका और तदनुसार यज्ञोंका वर्णन .....३१०—३३६
(विशेष बात ३१२; मार्मिक बात ३१२; विशेष बात ३२६; मार्मिक बात ३२८; विशेष बात ३३३)
३३—४२ज्ञानयोग और कर्मयोगकी प्रशंसा तथा प्रेरणा .....३३७—३५२
(ज्ञानप्राप्तिकी प्रचलित प्रक्रिया ३३७; विशेष बात ३४५, ३४७, ३४९)
चौथे अध्यायके पद, अक्षर और उवाच.....३५२
चौथे अध्यायमें प्रयुक्त छन्द .....३५२
पाँचवाँ अध्याय
१—६सांख्ययोग तथा कर्मयोगकी एकताका प्रतिपादन और कर्मयोगकी प्रशंसा .....३५३—३६६
(मार्मिक बात ३५९; विशेष बात ३६३)
७—१२सांख्ययोग और कर्मयोगके साधनका प्रकार .....३६६—३८०
(विशेष बात ३६७, ३७२; मार्मिक बात ३७८)
१३—२६फलसहित सांख्ययोगका विषय ....३८०—४०४
(समता-सम्बन्धी विशेष बात ३८९)
२७—२९ध्यान और भक्तिका वर्णन.....४०५—४०९
पाँचवें अध्यायके पद, अक्षर और उवाच ....४०९
पाँचवें अध्यायमें प्रयुक्त छन्द .....४०९
छठा अध्याय
१—४कर्मयोगका विषय और योगारूढ़ मनुष्यके लक्षण .....४११—४२०
(विशेष बात ४१३)
५—९आत्मोद्धारके लिये प्रेरणा और सिद्ध कर्मयोगीके लक्षण .....४२०—४३१
(उद्धार-सम्बन्धी विशेष बात ४२९; विशेष बात ४२९)
१०—१५आसनकी विधि और फलसहित सगुण-साकारके ध्यानका वर्णन.....४३१—४३८
(विशेष बात ४३२)
१६—२३नियमोंका और फलसहित स्वरूपके ध्यानका वर्णन .....४३८—४५०
(विशेष बात ४४०, ४४२, ४४४)
श्लोक-संख्याविषयपृष्ठ-संख्या
२४—२८फलसहित निर्गुण-निराकारके ध्यानका वर्णन .....४५०—४५९
(ध्यान-सम्बन्धी मार्मिक बात ४५२; परमात्मामें मन लगानेकी युक्तियाँ ४५६)
२९—३२सगुण और निर्गुणके ध्यान-योगियोंका अनुभव.....४५९—४६५
३३—३६मनके निग्रहका विषय.....४६५—४७१
(मार्मिक बात ४७०)
३७—४७योगभ्रष्टकी गतिका वर्णन और भक्ति-योगीकी महिमा.....४७१—४८८
(विशेष बात ४७३, ४७९, ४८१; मार्मिक बात ४८३, विशेष बात ४८७) छठे अध्यायके पद, अक्षर और उवाच .....४८८
छठे अध्यायमें प्रयुक्त छन्द .....४८८
सातवाँ अध्याय
१—७भगवान्के द्वारा समग्ररूपके वर्णनकी प्रतिज्ञा करना तथा अपरा-परा प्रकृतियोंके संयोगसे प्राणियोंकी उत्पत्ति बताकर अपनेको सबका मूल कारण बताना ४८९—५१०
(विशेष बात ४९१; शरणागतिके पर्याय ४९१; ज्ञान और विज्ञान-सम्बन्धी विशेष बात ४९४; विशेष बात ५०३)
८—१२कारणरूपसे भगवान्की विभूतियोंका वर्णन .....५१०—५२०
(विशेष बात ५१३, ५१८)
१३—१९भगवान्के शरण होनेवालोंका और शरण न होनेवालोंका वर्णन ....५२१—५४८
(विशेष बात ५२६, ५३१; मार्मिक बात ५३२, ५४२; महात्माओंकी महिमा ५४४)
२०—२३अन्य देवताओंकी उपासनाओंका फलसहित वर्णन .....५४८—५५४
(विशेष बात ५५३)
२४—३०भगवान्के प्रभावको न जाननेवालों-की निन्दा और जाननेवालोंकी प्रशंसा तथा भगवान्के समग्ररूपका वर्णन .५५४—५७७
(विशेष बात ५५५, ५६४; भगवान्के समग्ररूप-सम्बन्धी विशेष बात ५६८; अध्याय-सम्बन्धी विशेष बात ५७०) सातवें अध्यायके पद, अक्षर और उवाच .....५७६
सातवें अध्यायमें प्रयुक्त छन्द .....५७६