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भारतकोश
श्रीमद्भगवद्गीता साधक-संजीवनी (परिशिष्टसहित)

श्रीमद्भगवद्गीता साधक-संजीवनी (परिशिष्टसहित)

Shrimad Bhagavad Gita Sadhak Sanjeevani

स्वामी रामसुखदास द्वारा

स्रोत: संवर्धित नब्बेवाँ संस्करण (90th Edition), गीता प्रेस गोरखपुर · गीताप्रेस, गोरखपुर · 2008 (उद्गम)

DevanagariHindipublished1,299 पृष्ठ

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साधक-संजीवनीमें आयी

कहानियाँ

१. त्वष्ट्यद्वारा इन्द्रका वध करनेके लिये यज्ञ करना—१। ४० टि.

२. ब्रह्माजीके द्वारा तीन 'द' (दमन, दान, दया)-का उपदेश (बृहदारण्यकोपनिषद्)—३। १४

३. वर्षा न होनेपर किसान-बालकोंका हल चलाना और परिणामस्वरूप वर्षा होना—३। १४

४. फजीती और बदमाश—३। ३९ वि.

५. प्रज्ञाचक्षु सन्तका मन्दिर जाना—६। ४४

६. ध्रुवकी कथा—७। १६

७. एक वैरागी बाबाद्वारा सोनेकी मूर्ति बेचना—७। १९

८. संतको चोर समझकर लाठी मारना—७। १९

९. एक साधु और गोपियोंमें वार्ता—७। १९

१०. चौरासीका चक्कर (द्वार आनेपर सिरपर खुजली आना)—९। ३

११. नामदेवजीका घी लेकर कुत्तेके पीछे भागना—९। २४ टि.

१२. नामदेवजीके द्वारा प्रेतका उद्धार—९। २५ टि.

१३. कर्णपिशाचिनीकी उपासनासे दुर्गति—९। २५ वि.

१४. भावपूर्वक लगाये हुए भोगको भगवान् अवश्य स्वीकार करते हैं—९। २६ वि.

१५. सत्यकामका गुरुके आज्ञापालनसे कल्याण—१३। २५ परि.

१६. भगवान्द्वारा यक्षरूपसे इन्द्रका अभिमान दूर करना—१५। १२ परि.

१७. अतिथि-सत्कार करनेसे कपोत-कपोतीका कल्याण (महाभारत)—१६। ६ टि.

१८. धनसे जीवन नहीं चलता—१६। ११

१९. एक सुनारकी कहानी (पापका फल भोगना ही पड़ता है)—१८। १२ टि.

२०. श्यामलाल और रामलालकी कहानी (फौजदारी और दीवानी कोर्ट)—१८। १२ वि.

२१. धर्मका पालन सुख पानेकी इच्छासे नहीं किया जाता—१८। १२ टि.

२२. बनिया और चमार (पाप भगवान्के अपित नहीं होते)—१८। १२ वि.

२३. वेदव्यासजीके द्वारा कलियुगको, स्त्रियोंको तथा शूद्रोंको श्रेष्ठ बताना—१८। ४४

२४. विभीषणके प्रति भगवान् श्रीरामकी शरणागत-वत्सलता—१८। ६६

२५. माँ इधर क्यों आयी, उधर क्यों नहीं गयी?—१८। ६६ टि.

२६. वृक्षकी महिमा है या लता की? इसका हनुमान्जी द्वारा उत्तर—१८। ६६ वि.

२७. एक प्रज्ञाचक्षु सन्तकी घटना—१८। ६६ वि.

२८. बकरीद्वारा सिंहकी शरण लेना—१८। ६६ वि.

२९. कुलटा स्त्री और मौलवी—१८। ६६ वि.

३०. भगवान्का 'फनन्य' भक्त—१८। ६६ वि.

३१. एक अनभिज्ञ बालकका व्याख्यान—१८। ७०

३२. गीता पासमें रखनेसे चुड़ैलसे छुटकारा—१८। ७१

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